IAS Pulkit Garg News || Image- narendra pratap twitter
चित्रकूट: बड़े अफसर, नेता और कारोबारी अपनी संतानों की बेहतर शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। वे विदेशों के बड़े स्कूल-कॉलेजों में उनका दाखिला कराते हैं। बड़े स्कूलों के साथ-साथ उच्च शिक्षा के लिए भी महंगे कोचिंग संस्थानों को तरजीह देते हैं। (IAS Pulkit Garg News) इसके लिए वे मोटी फीस अदा करने से भी पीछे नहीं रहते।
हालांकि, इस परिपाटी से हटकर एक आईएएस अधिकारी ने नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए किसी बड़े प्ले-स्कूल को नहीं, बल्कि शहर की एक सरकारी आंगनबाड़ी को चुना है।
दरअसल, हम जिस आईएएस की बात कर रहे हैं, वे उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी पुलकित गर्ग हैं। पुलकित गर्ग वर्तमान में चित्रकूट जिले के कलेक्टर हैं।
सोशल मीडिया पर उनकी बेटी सिया का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बच्ची जमीन पर बैठकर दूसरी बच्चियों के साथ खिलौनों से खेलती नजर आ रही है, जबकि पास ही एक महिला उनकी देखभाल में जुटी हुई है। यह बच्ची कोई और नहीं, बल्कि चित्रकूट जिले के कलेक्टर पुलकित गर्ग की बेटी सिया है।
जिला कलेक्टर ने अपनी बेटी सिया का दाखिला शहर की एक सरकारी आंगनबाड़ी में कराया है। सिया रोज़ आम बच्चों के साथ खेलती है और आसपास की चीज़ों को समझने की कोशिश करती है। सोशल मीडिया पर डीएम की इस पहल की जमकर तारीफ हो रही है। कहा जा रहा है कि जिला मजिस्ट्रेट के इस कदम से सरकारी योजनाओं को लेकर आम जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
IAS पुलकित गर्ग #Chitrakut के DM है. इन्होने सरकारी आंगनबाड़ी केन्द्र में अपने बिटिया सिया का एडमीशन कराया है. सिया यहां मजे से बचपन के करतब सीख रही है.
DM साहब के इस कदम से सरकारी योजना को लेकर जनता का विश्वास बढ़ेगा pic.twitter.com/ovPD1f08kA
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) February 1, 2026
किसी उच्च अधिकारी के बच्चों का सरकारी आंगनबाड़ी या सरकारी स्कूल में दाखिला कराना यह पहला मामला नहीं है। (IAS Pulkit Garg News) कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी अवनीश शरण भी चर्चा में आए थे। उन्होंने एक जिले में पदस्थापना के दौरान अपने दोनों बच्चों का दाखिला वहां के शासकीय स्कूल में कराया था।
सरकारी स्कूल की यूनिफॉर्म में उनके बच्चों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। उस समय भी व्यवस्था में सुधार और सरकारी शिक्षा प्रणाली पर भरोसा बढ़ाने के लिए उनके प्रयासों की जमकर सराहना की गई थी।