चंदौली (उप्र), 17 जनवरी (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस एवं औरैया के एकीकृत न्यायालय परिसरों का शनिवार को शिलान्यास किया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस मौके पर कहा कि उत्तर प्रदेश में स्थापित होने वाले ये छह एकीकृत न्यायालय परिसर पूरे देश के लिए एक उदाहरण एवं मानक स्थापित करेंगे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां चंदौली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस एवं औरैया जिलों के एकीकृत न्यायालय परिसरों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिलान्यास (भूमि पूजन) किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शिलान्यास करने से पहले अपने संबोधन में कहा, ‘‘एक बार जब ये (एकीकृत न्यायालय परिसर) बन जाएंगे, तो मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश पूरे भारत के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा। ये परिसर पूरे देश के लिए एक मानक बनेंगे।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं जिस भी राज्य में जाऊंगा, गर्व और खुशी के साथ उत्तर प्रदेश का उदाहरण दूंगा। मैं संबंधित राज्य सरकार और उच्च न्यायालय से आह्वान एवं अपील करूंगा कि उस राज्य में भी यही सुविधा प्रदान की जाए।’’
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि भारत का संविधान जिला न्यायपालिका को महत्वपूर्ण स्थान देता है।
उन्होंने कहा कि एक सशक्त जिला न्यायपालिका की स्थापना से न्याय तक पहुंच के राष्ट्र के सपने की पूर्ति होगी।
उन्होंने कहा कि लोगों को अपने घरों के पास ही अदालती सुविधाएं मिलेंगी और यदि उन्हें उनके किसी कानूनी अधिकार से वंचित किया जाता है, तो वे अपने स्थानीय न्यायालयों में उन अधिकारों के लिए लड़ सकेंगे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा, ‘‘प्रत्येक जिला न्यायालय में जहां हमारी बेटियां और बहनें वकालत करती हैं, वहां महिलाओं के लिए एक अलग बार रूम बनाया जाना चाहिए। दूसरा, मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करूंगा कि इस विशाल और सुंदर परिसर में जहां भी संभव हो, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाए। कई बार मुवक्किल और अन्य लोग अदालत आते हैं, और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, आपने जो व्यवस्थाएं की हैं, जैसे योग केंद्र और पार्क, वे उत्कृष्ट हैं।’’
उन्होंने कहा, “यदि यह छोटी सी सुविधा भी जोड़ दी जाए, तो मुझे लगता है कि यह उन लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक होगा, जिन्हें अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यह विशेष रूप से हमारे बुजुर्ग मुवक्किलों के लिए लाभकारी होगा।’’
उन्होंने आगे कहा कि यह एकीकृत न्यायिक न्यायालय परिसर कम से कम अगले 50 वर्षों तक न्यायिक परिसर की आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करेगा।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘सभी प्रकार की सुविधाओं से सुसज्जित यह न्यायिक न्यायालय परिसर वकीलों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वादकारियों- आम जनता, जो न्याय के अपने अधिकार की मांग करते हुए अदालत में आते हैं, को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रशंसनीय है।’’
अपने भाषण का समापन करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘मैं प्रार्थना करता हूं कि यह एकीकृत न्यायालय परिसर वास्तव में न्याय का मंदिर सिद्ध हो। यहां हमारे न्यायिक अधिकारी करुणा के साथ न्याय करेंगे और मानवीय मूल्यों को बनाए रखेंगे, और बार के सदस्य महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे और मुझे विश्वास है कि आप उस भूमिका को बखूबी निभाएंगे।’’
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन न्यायालय परिसरों के निर्माण में करीब 1,500 करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है।
चंदौली के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चंदौली में बनने वाले अदालत परिसर की लागत करीब 236 करोड़ रुपये होगी, जिसमें 37 अदालत कक्ष, अधिवक्ताओं के चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास और जनपद न्यायाधीश का आवासीय भवन शामिल होंगे। यह परियोजना अप्रैल 2027 तक पूरी होने का अनुमान है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को गुलदस्ता और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने सीजेआई को प्रतीक चिह्न देकर उनका स्वागत किया। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश- न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति पंकज मित्थल समेत कई प्रमुख लोग इस मौके पर मौजूद रहे।
भाषा आनन्द संतोष दिलीप
दिलीप