पोत परिवहन कंपनियों की अधिक अधिभार की मांग, निर्यातकों ने जतायी चिंता

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पोत परिवहन कंपनियों की अधिक अधिभार की मांग, निर्यातकों ने जतायी चिंता

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  • Publish Date - March 5, 2026 / 05:15 PM IST,
    Updated On - March 5, 2026 / 05:15 PM IST

नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) निर्यातकों ने कहा है कि जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं ले जा रही पोत परिवहन कंपनियां 40 फुट के कंटेनर पर 4,000 डॉलर तक का आकस्मिक अधिभार मांग रही हैं। वे उन उत्पादों की खेप भी छोड़ने से इनकार कर रही हैं जो अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमले से पहले बंदरगाहों पर पहुंच गए थे।

इस मांग से भारतीय निर्यातकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें यह अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ रही है।

निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘‘28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले जहाज पश्चिम एशिया क्षेत्र के बंदरगाहों पर पहुंच गए थे। लेकिन वे माल की डिलिवरी नहीं कर रहे हैं और भारी अधिभार की मांग कर रहे हैं। हमने वाणिज्य मंत्रालय के समक्ष यह मुद्दा उठाया है।’’

सरकार ने भारत के निर्यात, विशेष रूप से आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान पर चल रहे वैश्विक घटनाक्रमों के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है।

ये शुल्क 28 फरवरी से ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण लगाए गए हैं।

सहाय ने कहा कि ये शुल्क उन उत्पादों पर भी लगाए जा सकते हैं जिन्हें अभी भारत से जहाजों पर लादा जाना बाकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उन्होंने सभी सामान पर शुल्क लगा दिया है। इससे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। माल की डिलिवरी नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि इस लागत को कौन वहन करेगा?”

घरेलू निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं क्योंकि पोत परिवहन कंपनियों ने पश्चिम एशियाई देशों के लिए माल लेना बंद कर दिया है।

मुंबई स्थित निर्यातक और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज इंडिया के संस्थापक चेयरमैन शरद कुमार सर्राफ ने कहा, ‘‘समुद्री माल ढुलाई भाड़ा लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गया है। धीरे-धीरे हमें कंटेनर की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जहाज बीच समुद्र में ही फंस रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि पोत परिवहन से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में घरेलू वस्तुओं की मूल्य प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होगी।

सर्राफ ने कहा कि पोत परिवहन कंपनियां केप ऑफ गुड होप मार्ग अपना रही हैं। इससे निर्यात खेपों के पहुंचने में देरी होगी।

सहाय ने यह भी कहा कि संघर्ष के कारण हवाई माल भाड़ा बढ़ने लगा है, जिससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होगी।

कोलकाता से पश्चिम एशिया जाने वाली कुछ विमानन कंपनियों ने अपना शुल्क 175 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।

सहाय ने कहा, ‘‘भारत के निर्यात पर इन समस्याओं का प्रभाव मार्च के आंकड़ों में दिख सकता है।’’

भारत का पश्चिम एशियाई देशों को निर्यात 2024-25 में 58.8 अरब डॉलर रहा था।

भाषा रमण अजय

अजय