CM Yogi Adityanath Statement: ‘सनातन की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती’, सीएम योगी ने ‘कालनेमि’ से किया सावधान

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CM Yogi Adityanath Statement: ‘सनातन की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती’, सीएम योगी ने ‘कालनेमि’ से किया सावधान

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 03:30 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 03:38 PM IST

CM Yogi Adityanath Statement/Image Credit: FILE

HIGHLIGHTS
  • सीएम योगी ने कहा- सनातन की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती
  • मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती
  • मुख्यमंत्री योगी ने कहा- राम के वैभव को बर्दाश्त नहीं करने वाले फैलाएंगे भ्रम, रामभक्तों को पहचानना होगा कालनेमि

CM Yogi Adityanath Statement: गोरखपुर: मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती है। पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन सभी का कल्याण वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है। 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती। अलग-अलग गति प्रगति नहीं, दुर्गति और अलग-अलग स्वर ताकत नहीं, पराजय का कारण बनेंगे।

मुख्यमंत्री योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।

रामभक्तों को पहचानना होगा कालनेमि

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन का वैभव जिन्हें बर्दाश्त नहीं है, वे दुष्प्रचार और भ्रम पैदा करेंगे। जिस तरह संजीवनी बूटी लेने जाते समय हनुमान जी ने कालनेमि को पहचान लिया था, उसी तरह रामभक्तों को भी भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा।

उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की आजादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे। संपूर्ण स्वाधीनता के लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी थी। उनका मानना था कि सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है तो अयोध्या में भी यह कार्य होना चाहिए। (CM Yogi Adityanath Statement)

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी। आज 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों को गौरव की अनुभूति करा रहा है।

मोदी के नेतृत्व में दिख रहा सनातन का वैभव

CM Yogi Adityanath Statement:  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने है। प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया के सामने सनातन परंपरा का सामर्थ्य रखा है। उन्होंने वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया। अपनी परंपरा का पालन करते हुए वृहद सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना होगा।

दोनों आचार्यों ने रखी भविष्य की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री योगी ने युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को नमन करते हुए कहा कि दोनों आचार्यों ने जिन विषयों के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। महापुरुषों के दूरदर्शी कार्य भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद दोनों आचार्यों के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।

गुलामी के दौर में रखी शिक्षा की नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का भाव था।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी महंत दिग्विजयनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएं सरकार को देने में उन्होंने श्रेय की चिंता नहीं की। आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएं संचालित हैं। इनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं। (CM Yogi Adityanath Statement)

मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने उस दौर में बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।

गोरक्षपीठ में जाति-पंथ का भेदभाव नहीं

CM Yogi Adityanath Statement:  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होते हुए भी पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं और सभी आचार्यों व संतों को समान सम्मान मिलता है।

वक्ताओं ने भी याद किया योगदान

अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाया। गोरखनाथ मंदिर आज सामाजिक समरसता का भी केंद्र है। काशी से आए जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत की साधना तभी सार्थक है, जब उससे लोककल्याण का मार्ग खुले। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि 1932 में बोया गया शिक्षा का बीज आज विशाल स्वरूप ले चुका है। कार्यक्रम में डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक श्री हनुमत् कथा पूजनम् का मुख्यमंत्री योगी और संतों ने विमोचन किया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, महंत बालकनाथ योगी, महंत योगी चेताईनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा और महंत मिथिलेशनाथ उपस्थित रहे। (CM Yogi Adityanath Statement)

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