गोरखपुर (उप्र), 29 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सामान्य व्यक्ति अपने परिवार के बारे में सोचता है, लेकिन महापुरुषों की दृष्टि दूरदर्शी होती है।
वह यहां गोरखनाथ मंदिर में आयोजित ‘युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि’ विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
आदित्यनाथ अपने गुरु के गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत एवं अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ‘सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह’ में शामिल होने के लिए सोमवार को ही यहां पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि जब देश गुलाम था तब महंत दिग्विजय नाथ ने बालिका शिक्षा और संस्कृत शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी तथा उनके जैसे कुछ ही लोग थे जो कहते थे कि गुलामी की बेड़ियां टूटेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वास्तव में आप जब महापुरुषों के बारे में सुनते हैं, पूज्य संतों के जीवन चरित्र को पढ़ते हैं तो एक नयी प्रेरणा प्राप्त होती है। महापुरुष केवल वर्तमान में नहीं जीता। जिनके कार्य दूरदर्शी होते हैं, वे हमें भले ही प्रत्यक्ष रूप में वर्तमान में दिखते हों, लेकिन उनकी कार्ययोजना भविष्य के एक सुदृढ़ नींव के रूप में नयी प्रेरणा देती है।’’
आदित्यनाथ ने कहा, ”आज युगपुरुष महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि है और कल मेरे पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यतिथि है।’’
उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद और अन्य संस्थाओं द्वारा किये जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आज से लगभग 94-95 वर्ष पहले जब देश गुलाम था, संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी।
उन्होंने बताया कि जब महंत से पूछा गया कि आपने महाराणा प्रताप के नाम पर इसका नामकरण क्यों किया तो उन्होंने कहा था कि जब भी भारत को स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का एहसास कराने के लिए किसी महापुरुष को आदर्श बताना हो, ‘‘तो हम सबके लिए महाराणा प्रताप एक आदर्श उदाहरण हो सकते हैं।’’
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि महाराणा प्रताप ने अकबर के खिलाफ 28 वर्ष की उम्र में स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म के लिए पहला युद्ध लड़ा था तथा अकबर द्वारा छीने गये सभी दुर्ग को अंतत: वापस लेकर मेवाड़ की धरती पर हिंदुत्व की ध्वजा को पुनर्स्थापित किया था।
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आनन्द सुभाष
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