(मीना झा, सीक्यू विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया)
मेलबर्न, 29 सितंबर (द कन्वरसेशन) सोने का समय हो गया है। आपने अलार्म लगाया और देखा कि आपके फोन की बैटरी केवल 23 प्रतिशत रह गई है, तो आपने उसे बिस्तर के पास चार्जर से जोड़ा और सो गए। सुबह तक फोन करीब सात-आठ घंटे चार्जर से जुड़ा रहा जबकि उसे 100 प्रतिशत तक पहुंचने में, खासकर फास्ट चार्जर से चार्ज करने पर इतना समय लगाने की जरूरत नहीं थी।
शायद यह बात आपके जहन में हो कि फोन को इस तरह लंबे समय तक चार्ज करने से उसकी बैटरी खराब हो सकती है। ‘लिथियम-आयन’ बैटरियों को दोबारा चार्ज करने योग्य बनाने वाली रासायनिक प्रक्रिया की एक सीमित उम्र होती है और बार-बार चार्ज-डिस्चार्ज होने के चक्र से यह उम्र कम होती जाती है।
पहले सलाह बिल्कुल स्पष्ट हुआ करती थी कि फोन को रातभर चार्जिंग पर न छोड़ें और बैटरी की उम्र बढ़ाने के लिए उसे 100 प्रतिशत तक चार्ज करने से बचें। आदर्श रूप से बैटरी को 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच रखना चाहिए।
सैद्धांतिक रूप से यह सलाह अब भी सही है, क्योंकि आपके फोन के भीतर मौजूद बैटरी की मूल रासायनिक संरचना में बदलाव नहीं हुआ है। बैटरी को बार-बार पूरी तरह शून्य प्रतिशत तक खत्म करना और फिर 100 प्रतिशत तक चार्ज करना उसकी उम्र कम कर देगा।
हालांकि, आधुनिक फोन में बैटरी की सेहत को बेहतर बनाए रखने की व्यवस्था और चार्जिंग नियंत्रण पहले से बेहतर हो गए हैं। इसी वजह से हाल के वर्षों में इस सवाल का जवाब थोड़ा अधिक जटिल हो गया है कि क्या फोन को रातभर चार्जर से जोड़े रखना ठीक है ?
—– बेहतर चार्जिंग व्यवस्था —–
रातभर चार्ज न करने की सलाह देने के बजाय आधुनिक फोन अब तेजी से यह नियंत्रित करने में सक्षम हो रहे हैं कि रात में बैटरी के साथ क्या होता है।
एप्पल ने 2019 से ‘ऑप्टिमाइज्ड बैटरी चार्जिंग’ की सुविधा दे रखी है। यह सुविधा उपयोगकर्ता की रोजाना की चार्जिंग आदतों को समझती है और जब इस बात का अंदेशा होता है कि फोन को लंबे समय तक चार्ज किया जाएगा तो एक निश्चित प्रतिशत के बाद चार्जिंग की गति धीमी कर देती है।
सैमसंग और गूगल पिक्सल फोन में भी यह सुविधा है। पिक्सल फोन में ‘एडैप्टिव चार्जिंग’ की सुविधा होती है, जो चार्जिंग की आदतों को समझकर रात के दौरान चार्जिंग धीमी कर देती है और कोशिश करती है कि आमतौर पर जिस समय आप फोन को चार्जर से हटाते हैं, उससे कुछ समय पहले ही बैटरी 100 प्रतिशत तक पहुंचे।
सैमसंग फोन में ‘स्लीप टाइम प्रोटेक्शन’ की सुविधा है, जो आपके सोने के दौरान चार्जिंग को करीब 80 प्रतिशत पर रोक देती है और आपके जागने से ठीक पहले बैटरी को 100 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए चार्जिंग को समायोजित करती है।
नए आईफोन 17 के साथ एप्पल ने ‘एडैप्टिव पावर मोड’ भी पेश किया है। यह बैटरी की सामान्य खपत को समझता है और यह अनुमान लगाता है कि उपयोगकर्ता के फोन की बैटरी कब कम हो सकती है। इसके बाद यह बिजली के इस्तेमाल को इस तरह समायोजित करता है कि बैटरी पूरे दिन चल सके।
—– चार्जिंग की सीमा तय करना —–
तो फिर केवल 80 प्रतिशत तक चार्ज करने के बारे में क्या कहा जाए? बैटरी को लंबे समय तक अधिक चार्ज रखना उसकी उम्र कम कर सकता है। लेकिन निर्माता अब खुद भी 80 प्रतिशत को एकमात्र विकल्प नहीं मानते।
सैमसंग अपने नवीनतम फोन के उपयोगकर्ताओं को बैटरी सुरक्षा की ऐसी व्यवस्था करने की अनुमति देता है, जिसमें वे अपनी पसंद के अनुसार चार्जिंग की अधिकतम सीमा 80, 85, 90 या 95 प्रतिशत तय कर सकते हैं।
एप्पल के आईफोन 15 और उसके बाद के मॉडलों में भी इसी तरह की सुविधा है जिसमें उपयोगकर्ता पांच प्रतिशत के अंतर से 80 से 100 प्रतिशत के बीच चार्जिंग की सीमा तय कर सकते हैं। फोन, उपयोगकर्ता की चार्जिंग आदतों के आधार पर किसी खास सीमा की सिफारिश भी कर सकता है।
‘एडैप्टिव चार्जिंग’ का इस्तेमाल करने के बजाय गूगल पिक्सल 6ए और उसके बाद के उपकरणों में चार्जिंग की सीमा सीधे 80 प्रतिशत तय की जा सकती है। यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिनके दिन के अंत में आमतौर पर कुछ बैटरी बची रहती है।
आखिरकार, फोन को पूरी तरह चार्ज न करने से बैटरी की उम्र तो बढ़ सकती है, लेकिन रोजाना इस्तेमाल के लिए बैकअप कुछ कम मिलेगा।
अगर 80 प्रतिशत चार्ज से आपका फोन पूरे दिन आसानी से चल जाता है, तो चार्जिंग की सीमा इससे कम रखना बेहतर हो सकता है। लेकिन अगर आप यात्रा पर हैं या लंबे समय तक चार्जर से दूर रहेंगे, तो बैटरी को अधिक चार्ज करना आपके लिए उपयोगी होगा।
अगर आप कम चार्जिंग सीमा तय भी करते हैं, तो भी आपका फोन कभी-कभी खुद 100 प्रतिशत तक चार्ज हो सकता है, ताकि उपकरण में बैटरी के स्तर की सही जानकारी बनी रहे।
—– आप कुछ भी करें, गर्मी से बचाएं —–
हालांकि चार्जिंग की ये नई सुविधाएं बैटरी की उम्र बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन वे एक अन्य महत्वपूर्ण कारक ‘गर्मी’ से पूरी तरह नहीं निपटतीं।
‘लिथियम-आयन’ बैटरियों में मौजूद रासायनिक पदार्थ अधिक तापमान के प्रति संवेदनशील होते हैं और गर्म परिस्थितियों में रखे जाने पर समय के साथ खराब होते जाते हैं। खासकर तब, जब बैटरी भी उसी समय चार्ज हो रही हो।
फोन भी अब बढ़ते तापमान पर प्रतिक्रिया देने लगे हैं। उपकरण के अधिक गर्म होने का पता चलने पर चार्जिंग की सीमा अपने आप लागू हो जाती है।
इस मामले में सामान्य सलाह अब भी वही है। अपने फोन को अत्यधिक गर्मी से हमेशा दूर रखें। इन सलाह में फोन को तेज धूप के बीच कार में छोड़ना या सीधे धूप में रखना भी शामिल हैं।
अगर आप सोने के समय फोन चार्ज करते हैं, तो उसे तकिये या अन्य बिस्तर के नीचे न रखें। इससे गर्मी बाहर नहीं निकल पाएगी और फोन के अत्यधिक गर्म होने का खतरा बढ़ सकता है।
—– तो क्या फोन को रातभर चार्ज कर सकते हैं? —–
अधिकतर आधुनिक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए इसका जवाब हां है। फोन खुद चार्जिंग को नियंत्रित करता है और आपको रात के बीच में उठकर चार्जर निकालने की जरूरत नहीं है।
इसके बजाय देखें कि आपके फोन में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं और अगर वे आपकी दिनचर्या के अनुकूल हों, तो ‘ऑप्टिमाइज्ड’, ‘एडैप्टिव’ या नींद के समय के अनुसार चार्जिंग की सुविधा का इस्तेमाल करें। अगर आपको हर दिन 100 प्रतिशत बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती, तो कम चार्जिंग सीमा तय करने पर विचार कर सकते हैं। सबसे बढ़कर, फोन को अत्यधिक गर्म होने से बचाएं।
फोन की बैटरियां समय के साथ कमजोर होती ही हैं, लेकिन स्मार्ट चार्जिंग सुविधाओं की मदद से अब उनकी उम्र बढ़ाने के हमारे पास पहले से ज्यादा विकल्प हैं। इसलिए फोन की ‘सेटिंग्स’ जरूर देखें और उपलब्ध स्मार्ट चार्जिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करें।
द कन्वरसेशन
खारी मनीषा
मनीषा