CM Yogi News: भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूरे, सीएम योगी ने किया ‘स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह’ का शुभारंभ, कहा- परंपरा और संस्कृति का सम्मान करना जानता है भारतीय समाज
भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूरे, सीएम योगी ने किया ‘स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह’ का शुभारंभ, CM Yogi inaugurated 'Golden Jubilee Theatre Festival
लखनऊ: CM Yogi News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि भारतीय समाज अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सम्मान देना जानता है। योगी आदित्यनाथ ने यहां भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य ‘स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह’ की शुरुआत की जो 12 अप्रैल जारी रहेगा। इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “आज रंगमंच अच्छा प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है तो समाज भी उस अच्छाई को उसी रूप में स्वीकार कर रहा है।”
योगी ने कहा, “समाज में अच्छाई को देखना है तो हमें यह भी देखना होगा कि अब तक दुनिया का सबसे लोकप्रिय धारावाहिक ‘रामायण’ रहा है। यह भारतीय समाज है, जो अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सम्मान देना जानता है।” उन्होंने प.बंगाल के अकाल पर आधारित बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय कृत ‘आनंद मठ’ से प्रेरित एक नाट्य प्रस्तुति देखने के बाद उसकी सराहना की और कहा, “वंदे मातरम् की प्रस्तुति हर जिले में आयोजित की जानी चाहिए। यह प्रस्तुति 15 मिनट की नहीं, बल्कि दो घंटे की होनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “मंचन के दौरान लोगों को उस त्रासदी का एहसास कराना आवश्यक है।’’
अकादमी के लोगों को सीएम ने दी बधाई
CM Yogi News: मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम अपने नागरिकों को सम्मान देने में परहेज करते हैं। पहले गुंडों और खलनायकों को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। समाज के खलनायकों को प्रस्तुत करने का परिणाम यह हुआ कि समाज में उसी प्रकार के चरित्र सामने आए।” अकादमी की 50 वर्ष की यात्रा पर बधाई देते हुए योगी ने कहा, “हम बचपन से सुनते आए हैं कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और वही समाज की दिशा तय करता है।” उन्होंने कहा, “रंगमंच वह स्थान है, जहां भावनाएं शब्द बनती हैं, शब्द अभिनय में बदलते हैं और वही अभिनय जनचेतना बनकर समाज को नयी दिशा देता है, जैसा कि ‘आनंद मठ’ के ‘वंदे मातरम्’ गीत के माध्यम से देखा जा सकता है।”
‘डबल इंजन’ सरकार की कार्यप्रणाली का किया उल्लेख
योगी ने कहा, “यह गीत प्रमाण है कि राष्ट्रभक्ति क्या होती है, स्वराज का महत्व क्या है और पराधीनता क्या होती है। विदेशी हुकूमत ने बंगाल के अकाल को गंभीरता से नहीं लिया था—लोग भूखे मर रहे थे, लेकिन अंग्रेज सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।” उन्होंने उस दौर की चर्चा करते हुए कहा, “मैं कल 1921 की जनगणना के आंकड़े देख रहा था, जो रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। यह वह दशक था, जब भारत की आबादी बढ़ने के बजाय घटी थी।” आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “तब देश की आबादी 30 करोड़ से कम थी और लगभग तीन करोड़ लोग अकाल की चपेट में आ गए थे, लेकिन विदेशी शासन के अत्याचार जारी रहे।” मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान भारतीय जनता पार्टी नीत ‘डबल इंजन’ सरकार की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा, “इसके विपरीत, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय पूरी दुनिया प्रभावित थी और भारत में भी लॉकडाउन लगाया गया। बचाव के कई प्रयास किए गए।” उन्होंने कहा, “याद कीजिए, श्रमिक अपने घरों की ओर लौटे। हमने उनके लिए वाहन की व्यवस्था की, पृथकवास केंद्र बनाए, उन्हें घर तक पहुंचाया और नियमित राशन की सुविधा उपलब्ध कराई।” योगी ने कहा, “जब सरकार में संवेदनशीलता होती है, तो वह सीधे सामने आकर बीमारी से लड़ती है और उसे परास्त भी करती है।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित दो स्वदेशी टीके दुनिया के लिए उदाहरण हैं। जब सरकार संवेदनशील होती है, तो वह बेहतर व्यवस्था करती है। इसके विपरीत, संवेदनहीन विदेशी शासन का चित्र ‘आनंद मठ’ के माध्यम से सामने आता है।” उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने बंगाल के अकाल की व्यापक त्रासदी को लेकर यह उपन्यास लिखा था, और उस समय की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन लोगों ने भी किया सभा को संबोधित
उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस संस्था ने नाट्य कला के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश स्तर पर गौरव बढ़ाया है। बीएनए के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा और लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित थे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारतेंदु नाट्य अकादमी की स्थापना वर्ष 1975 में महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की स्मृति में उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा की गई थी। इसमें कहा गया कि वर्ष 1976 से यहां नाट्य कला का व्यवस्थित प्रशिक्षण शुरू हुआ और 1981 में दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया, जिससे यह संस्थान देश के प्रमुख नाट्य प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल हो गया।
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