उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन न होने पर मुख्य सूचना आयुक्त को अवमानना नोटिस
उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन न होने पर मुख्य सूचना आयुक्त को अवमानना नोटिस
लखनऊ, 11 सितंबर (भाषा ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन अप्रैल 2026 के उसके आदेश का कथित रूप से अनुपालन न होने के कारण शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की।
उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने विशाल कुमार गुप्ता की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए, मुख्य सूचना आयुक्त डॉ. राज कुमार विश्वकर्मा को नोटिस जारी किया।
उच्च न्यायालय ने मुख्य सूचना आयुक्त से यह स्पष्टीकरण मांगा कि अदालत के आदेश की कथित जानबूझकर और इरादतन अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना का आरोप क्यों न तय किया जाए।
उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर के लिए तय की और विश्वकर्मा को निर्देश दिया कि यदि पहले के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है, तो वह अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करें।
यह अवमानना याचिका तीन अप्रैल के आदेश से जुड़ी है, जिसके तहत याचिकाकर्ता को अपनी नौकरी से जुड़ी शिकायतों के बारे में सक्षम अधिकारी के सामने एक नया व्यक्तिगत प्रतिवेदन जमा करने की अनुमति दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने संबंधित प्रशासन को निर्देश दिया था कि प्रतिवेदन मिलने के चार सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार स्पष्ट और तर्कपूर्ण आदेश पारित करें।
गुप्ता ने आरोप लगाया कि तय समय के भीतर निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें अवमानना याचिका के माध्यम से फिर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
उच्च न्यायालय ने हालांकि मुख्य सूचना आयुक्त को उसके पिछले आदेश का पालन करने का एक और मौका दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर तीन अप्रैल के आदेश का पालन पहले ही किया जा चुका है तो विश्वकर्मा अगली सुनवाई की तारीख से पहले अनुपालन हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में उनके व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया है, तो मुख्य सूचना आयुक्त को निर्देश है कि वह अवमानना आदेश की जानकारी मिलने के दो सप्ताह के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करें।
उन्हें याचिकाकर्ता को खर्च के तौर पर 5,000 रुपये के भुगतान के सबूत के साथ अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि राज्य सरकार के खजाने से नहीं दी जाएगी।
भाषा सं जफर राजकुमार
राजकुमार

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