लखनऊ, 15 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा है कि अयोध्या के राम मंदिर में केवल उन्हीं लोगों का चढ़ावा चोरी हुआ है जिन्होंने ”शायद सच्ची श्रद्धा से दान नहीं दिया था।”
इस बयान पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया के बाद महाना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह टिप्पणी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए थी, जिन्होंने राम मंदिर में किया गया अपना दान वापस करने की मांग की थी।
हालांकि, इसके बावजूद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने महाना के बयान को लेकर उन पर निशाना साधना जारी रखा।
विवाद तब शुरू हुआ जब एक समाचार पोर्टल द्वारा प्रसारित वीडियो में महाना ने सिंह की ओर इशारा कते हुए कथित तौर पर कहा कि “जो लोग अपना दान वापस करने की मांग रहे हैं, उन्होंने शायद सच्ची श्रद्धा से दान नहीं किया था।”
सिंह ने ‘चढ़ावा चोरी’ मामले में दिये गये अपने बयान में कथित तौर पर कहा था कि वह अयोध्या जाकर दावा पेश करेंगे कि उन्होंने जो चंदा दिया था, उसका दुरुपयोग किया गया है वह उन्हें वापस दिया जाये।
महाना ने कहा कि जो लोग अपना धन वापस मांग रहे हैं, हो सकता है कि उन्होंने ‘सच्ची’ श्रद्धा से दान न दिया हो।
उन्होंने कहा, ”हमारी ओर से दिया गया चढ़ावा चोरी नहीं हुआ क्योंकि हम इसे अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के रूप में देख सकते हैं।’
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने महाना के बयान की आलोचना की थी, जिसके बाद उन्होंने यह सफाई दी है।
महाना ने यह दलील भी दी कि देश में चोरी की घटना पहली बार नहीं हुई है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना जी के मुताबिक राम मंदिर के चंदे में जिनका पैसा चोरी हुआ, उन्होंने ‘सच्ची श्रद्धा’ से दान नहीं दिया था। यानी सरकार की कोई नाकामी नहीं है, सारा दोष जनता की नीयत का है!’
पोस्ट में कहा गया है, ‘क्या भाजपा सरकार अब अपराध रोकने के बजाय जनता की श्रद्धा का ऑडिट करेगी? यूपी में लूटने वालों के हौसले बुलंद हैं और सत्ता में बैठे लोग ऐसा अजीबोगरीब तर्क दे रहे हैं।’
समाजवादी पार्टी मीडिया प्रकोष्ठ ने भी विधानसभा अध्यक्ष की इन टिप्पणियों की आलोचना करते हुए इन्हें निंदनीय बताया।
पार्टी ने पोस्ट में कहा, ‘बेहद शर्मनाक और निंदनीय बयान। आदरणीय श्री सतीश महाना जी को ऐसे बयानों से बचना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष पद की गरिमा अनुरूप उन्हें बयान देना चाहिए, जनभावना के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।’
पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा गया, ‘मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट तो अयोग्य हैं, अज्ञानी हैं, अहंकारी हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष महोदय तो अनुभवी हैं, उन्हें तो ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था, या ये भाजपाई संस्कार हैं जो मुंह से निकल पड़े?’
बाद में बुधवार को ‘पीटीआई वीडियो’ से बात करते हुए महाना ने कहा कि उनकी टिप्पणी खास तौर पर दिग्विजय सिंह के बयान के संदर्भ में थी और उसका कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वहां कुछ लोगों ने चोरी की। सरकार ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई और कार्रवाई करते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया गया। जो भी इसमें शामिल है उसे सजा मिलनी चाहिये, चाहे वह किसी भी पद पर हो।”
महाना ने सवाल उठाते हुए कहा, ”जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया, जिन्होंने जय श्री राम का नारा लगाने वालों को जेल भेजा, जिन्होंने मंदिर बनने से पहले या बाद में कभी मंदिर के दर्शन नहीं किए, और जिनकी सरकारों के समय बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद तीन सरकारें गिर गईं वे अब राम मंदिर को लेकर चिंता जता रहे हैं। यह मेरे लिए हैरानी की बात है।”
महाना ने अपनी पिछली टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए कहा, ”जब दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर में दान दिया गया उनका धन वापस किए जाने चाहिए तो मैंने कहा कि शायद उन्होंने श्रद्धा के साथ दान नहीं किया था क्योंकि श्रद्धा के साथ दिया गया पैसा कभी वापस नहीं मांगा जाता। भक्त अपने चढ़ावे को वापस नहीं मांगते।”
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कथित चोरी में ‘आस्था के साथ दिया गया धन’ शामिल था, लेकिन यह कहना गलत है कि भक्तों द्वारा दिया गया सारा दान चोरी हो गया है।
उन्होंने कहा, ”ट्रस्ट के खातों में जमा धन भक्तों का है। कोई यह कैसे कह सकता है कि भक्तों द्वारा दान किया गया सारा धन चोरी हो गया है? चोरी दुर्भाग्यपूर्ण है और जिम्मेदार लोगों को सजा दी जा रही है लेकिन श्रद्धा को पैसे के तौर पर नहीं मापा जा सकता।”
महाना ने यह भी कहा कि लाखों भक्तों ने अपनी क्षमता के अनुसार मंदिर निर्माण में योगदान दिया था और यह मंदिर सामूहिक आस्था और बलिदान का प्रतीक है।
दिग्विजय सिंह की टिप्पणी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने श्रद्धा के साथ दान नहीं किया था और वे अपना पैसा वापस चाहते हैं, तो ट्रस्ट इसे वापस कर सकता है, या मैं इसे वापस कर दूंगा।”
महाना ने आरोप लगाया कि कुछ नेता चोरी को भक्तों की आस्था से जोड़कर पूरे हिंदू समुदाय पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि अगर मंदिर के दान प्रबंधन से कोई मुस्लिम जुड़ा होता तो चोरी नहीं होती।
महाना ने कहा, ”क्या इसका मतलब यह है कि पूरा हिंदू समुदाय बेईमान है? हिंदू समाज के लिए ऐसे बयान स्वीकार्य नहीं हैं।”
राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी के मामले में पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने एक एसआईटी का गठन किया था जिसकी शुरुआती रिपोर्ट के बाद गत 25 जून को आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार किया गया है। मामला तूल पकड़ने पर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने—अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।
भाषा किशोर सलीम जोहेब
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