दिल्ली इमारत हादसा: जान गंवाने वालों में चंदौली का छात्र भी शामिल
दिल्ली इमारत हादसा: जान गंवाने वालों में चंदौली का छात्र भी शामिल
चंदौली (उप्र), नौ सितंबर (भाषा) दिल्ली में गत छह सितंबर को एक इमारत के ढहने से जान गंवाने वाले लोगों में चंदौली निवासी बीकॉम तृतीय वर्ष का एक छात्र भी शामिल था तथा उसके दुखी पिता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी भी अधिकारी द्वारा परिवार से संपर्क नहीं करने का आरोप लगाया है।
छात्र अभिषेक खरवार के पिता संतोष खरवार ने बताया उनका बेटा दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के मोतीलाल नेहरू कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई कर रहे थे। वह सत्य निकेतन में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास में रह रहे थे क्योंकि उनके कॉलेज में छात्रावास की सुविधा नहीं थी।
घटना के तीन दिन बाद, स्थानीय उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और एक लेखपाल बुधवार को चंदौली में परिवार के घर पहुंचे और संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को हर संभव सरकारी सहायता दिये जाने का आश्वासन दिया।
संतोष ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”अभिषेक भी दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र था, लेकिन इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद विश्वविद्यालय का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौके पर नहीं पहुंचा और न ही हमसे संपर्क किया।”
उन्होंने कहा कि अभिषेक ने मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम में दाखिला लिया था और चूंकि कॉलेज ने छात्रावास की सुविधा नहीं दी, इसलिए परिवार ने उनके लिए सत्य निकेतन में एक पीजी में किराए के कमरे की व्यवस्था की। संतोष ने कहा, ”हमें कभी नहीं लगा कि वहां रहने में कोई खतरा है।”
उन्होंने बताया कि इलाके की ज्यादातर पीजी इमारतें करीब 20 से 25 साल पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि अभिषेक ने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ाई की थी और उसकी चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की इच्छा थी और वह बीकॉम की पढ़ाई के साथ-साथ सीए परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था।
संतोष ने कहा कि वह हादसे के अगले दिन सुबह करीब 10 बजे दिल्ली पहुंचे और घटना के बाद अभिषेक को निकालकर एम्स ले जाया गया था।
उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि अभिषेक मलबे में फंसे होने के बाद छह सितंबर की रात करीब सवा नौ बजे तक घायल हालत में जिंदा रहा, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि मौत के कारण के बारे में, संतोष ने कहा कि परिवार को सूचित किया गया था कि एम्स की रिपोर्ट 20-21 दिनों के बाद ही उपलब्ध होगी, जिससे उन्हें अभी तक मौत के सटीक कारण के बारे में स्पष्टता नहीं मिली है।
उन्होंने बताया कि परिवार ने आठ सितंबर को अभिषेक के शव को वाराणसी लाने से पहले उनकी आंखें दान कर दीं। उन्होंने बताया कि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
संतोष ने कहा कि अभिषेक की मां अपने बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद से गमगीन है और उनके दो बेटों में अभिषेक छोटा था।
संतोश ने सरकार से दिल्ली विश्वविद्यालय के उन सभी कॉलेज में छात्रावास की सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, जहां वर्तमान में ऐसा आवास उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने छात्रों को आवास देने वाले सभी पीजी भवनों के निरीक्षण की भी मांग की और कहा कि जो भवन सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं, उन्हें छात्रों को किराये पर देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास लड़कों के पीजी आवास वाली इमारत छह सितंबर को अपराह्न करीब 1.30 बजे ढह गई। यह हादसा उस समय हुआ जब इमारत में मरम्मत का काम जारी था। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सहित कई एजेंसियों ने बचाव अभियान में भाग लिया।
भाषा सं जफर
अमित
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