ब्रिक्स सम्मेलन में जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि : मायावती

ब्रिक्स सम्मेलन में जारी 'दिल्ली घोषणापत्र' सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि : मायावती

ब्रिक्स सम्मेलन में जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि : मायावती
Modified Date: September 13, 2026 / 12:35 pm IST
Published Date: September 13, 2026 12:35 pm IST

लखनऊ, 13 सितंबर (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि करार देते हुए रविवार को कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की इच्छा भी उम्मीद जगाने वाली है।

मायावती ने यहां संवाददाताओं से कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के कारण बढ़े तनाव तथा शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे ब्रिक्स देशों द्वारा अपने 18वें शिखर सम्मेलन में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से जारी किया जाना आपसी सूझबूझ और कूटनीतिक उपलब्धि से कम नहीं है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा भी उम्मीद जगाती है। इस दिशा में ‘ब्रिक्स करेंसी’ का विकास भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि इसके अलावा फलस्तीन के मुद्दे पर ‘दो-राष्ट्र समाधान’ और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के समर्थन के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता व्यक्त करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इससे भारत के दृष्टिकोण को उचित समर्थन मिला है, जो सराहनीय है।

बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि पड़ोसी देश चीन के साथ मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देने और दोनों देशों को एक-दूसरे के विकास में साझेदार के रूप में देखने के दृष्टिकोण के क्या सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का जितनी जल्दी आपसी सहमति से समाधान हो जाए, उतना ही बेहतर होगा।

भाषा सलीम गोला

गोला


लेखक के बारे में