Indian Labourer Saudi Prison : सऊदी की जेल में कैद घर का इकलौता कमाने वाला, जर्जर चौखट पर टिकी निगाहें, अब सरकार से मदद की आखिरी गुहार
Uttar Pradesh के देवरिया जिले के एक मजदूर बैरिस्टर केवट पिछले एक साल से Saudi Arabia की जेल में बंद हैं। परिवार का आरोप है कि उन्हें एक कानूनी मामले में फंसाया गया है। अब परिवार शासन-प्रशासन से मदद और सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगा रहा है।
Indian Labourer Saudi Prison / Image Source : IBC24
- Uttar Pradesh के देवरिया निवासी बैरिस्टर केवट एक साल से सऊदी अरब की जेल में बंद।
- परिवार का दावा—कानूनी मामले में फंसाया गया, भारी जुर्माने की मांग।
- बूढ़ी मां, पत्नी और तीन बच्चों की आर्थिक हालत खराब, सरकार से मदद की अपील।
अमित राज पाल, देवरिया : Indian Labourer Saudi Prison उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का एक परिवार आज गहरे संकट में है। घर की गरीबी दूर करने और बच्चों के सुनहरे भविष्य का सपना लेकर सात समंदर पार सऊदी अरब गया ‘बैरिस्टर केवट’ पिछले एक साल से वहां की जेल में बंद है। अनजान देश और वहां के कड़े कानूनों की जानकारी न होना इस मजदूर के लिए काल बन गया। अब वतन में उसकी बूढ़ी मां, पत्नी और मासूम बच्चों की आंखें सिर्फ दरवाजे पर टिकी हैं और जुबान पर शासन-प्रशासन से मदद की गुहार है।
कानूनी मामले में फंसाया गया है
देवरिया मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर माधोपुर गांव की जर्जर दीवारें बैरिस्टर केवट की बेबसी की गवाह हैं। कच्ची छत, मिट्टी का चूल्हा और सूना आंगन चीख-चीख कर उस आर्थिक तंगी को बयां कर रहे हैं, जिसे सुधारने के लिए बैरिस्टर ने विदेश का रुख किया था। परिवार का कहना है कि उसे एक कानूनी मामले में फंसाया गया है और अब जुर्माने के तौर पर लाखों रुपयों की मांग की जा रही है, जिसे जुटाना इस गरीब परिवार के लिए नामुमकिन है।
बिखरता परिवार
बैरिस्टर के पीछे उसका भरा-पूरा परिवार है दो बेटियां और एक बेटा। पिता के जेल जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है।Indian Labourer Saudi Prison पत्नी शकुंतला देवी और घर की अन्य महिलाएं दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रही हैं। शकुंतला देवी का कहना है, “हम बहुत गरीब हैं, सरकार से हाथ जोड़कर विनती है कि हमारे आदमी को वापस ला दें।”
प्रसाशन से लगा रहे गुहार
ग्रामीणों के अनुसार बैरिस्टर एक बेहद मेहनती व्यक्ति था। अब सारा दारोमदार कूटनीतिक हस्तक्षेप पर टिका है। परिवार की मांग है कि भारतीय दूतावास के जरिए उसे कानूनी सहायता प्रदान की जाए और जुर्माने में राहत दिलाकर उसकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाए।

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