प्रतिबंध के बावजूद क्या आनलाइन मंचों पर हो रही है चीनी मांझे की बिक्री, पता करे सरकार: उच्च न्यायालय
प्रतिबंध के बावजूद क्या आनलाइन मंचों पर हो रही है चीनी मांझे की बिक्री, पता करे सरकार: उच्च न्यायालय
लखनऊ, 15 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को यह जांच करने का निर्देश दिया कि प्रतिबंध के बावजूद क्या ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से चीनी मांझे की बिक्री अब भी जारी है।
अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से 27 जुलाई तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने 2018 से लंबित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
यह जनहित याचिका एम.एल. यादव ने दायर की थी। वहीं, रज्जन खान की ओर से दायर दो अन्य संबंधित याचिकाओं में राज्य में चीनी मांझे के आयात, निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझा विभिन्न ई-कॉमर्स मंचों पर उपलब्ध है। उन्होंने एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का भी हवाला दिया, जिसमें इसकी कथित ऑनलाइन बिक्री का उल्लेख किया गया था।
इस पर पीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को इन दावों की सत्यता की जांच कर उसके परिणाम से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार ने हाल में उच्च न्यायालय को बताया था कि चीनी मांझे की खरीद-फरोख्त पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वह ‘उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग प्रतिषेध) अधिनियम’ नाम से नया कानून लाने की तैयारी कर रही है।
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित कानून में चीनी मांझे से घायल होने या जान गंवाने वाले लोगों के लिए मुआवजा का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है।
भाषा सं सलीम खारी
खारी

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