पहले उप्र पुलिस भर्ती में आवेदन नहीं करने वालों को भी नियुक्ति पत्र दे दिया जाता था: आदित्यनाथ
पहले उप्र पुलिस भर्ती में आवेदन नहीं करने वालों को भी नियुक्ति पत्र दे दिया जाता था: आदित्यनाथ
लखनऊ(उप्र), 20 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को विपक्ष की पूर्ववर्ती सरकारों, खास तौर पर बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी (सपा), पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उप्र पुलिस की भर्ती में वर्ष 2017 से पहले उन लोगों को भी नियुक्ति पत्र दे दिया गया जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था।
योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के अंतर्गत चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) एवं पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं।
आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 के पहले परीक्षा की शुचिता और चयन प्रक्रिया को लेकर प्रश्न उठते थे, पेपर लीक के मामले अलग से होते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘उप्र पुलिस की इस बात को लेकर बदनामी थी कि परीक्षा कोई और दे रहा है और नियुक्ति पत्र कोई और प्राप्त कर रहा है।’’
आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि, ‘‘वर्ष 2017 के पहले जो अभ्यर्थी नहीं थे, उन्हें नियुक्ति पत्र दे दिया गया और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।’’
उप्र में 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार थी।
आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर भर्ती में कथित अनियमितताओं, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ‘उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य बना दिया था’, उन्हें मौजूदा सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। पूर्व में ‘बीमारू राज्य’ वाक्यांश का इस्तेमाल बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के पिछड़ेपन को दर्शाने के लिए किया जाता था।
मुख्यमंत्री ने बदलाव में सबसे बड़ी भूमिका उप्र पुलिस की बताते हुए कहा कि 2017 से पहले उप्र के बहुत से इलाकों में शोहदों के डर से लोग अपनी बेटी को घर से बाहर उप्र से दूर पढ़ाने के लिए मजबूर थे और जिसके पास क्षमता नहीं थी वह उसे घर में बिठाने के लिए मजबूर था।
उन्होंने कहा, ‘‘आज कोई बेटी के साथ छेड़छाड़ करेगा तो उसे मालूम है कि अंजाम क्या होगा, अगर उसे नहीं मालूम है तो मुझे पता है कि वह अपनी मौत पर हस्ताक्षर कर रहा है।’’
इस मौके पर उप्र सरकार के वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि 2017 के पहले की भर्तियां विवादों और संदेह के घेरे में रहती थीं और तमाम तरीके के हथकंडे आजमाए जाते थे। उन्होंने दावा किया कि अब केवल योग्यता और क्षमता के आधार पर नियुक्ति हो रही है।
भाषा आनन्द
संतोष
संतोष

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