शाहजहांपुर में शहीदों की तोड़ी गई प्रतिमाओं को मरम्मत कर लगाने को लेकर खड़ा हुआ नया विवाद
शाहजहांपुर में शहीदों की तोड़ी गई प्रतिमाओं को मरम्मत कर लगाने को लेकर खड़ा हुआ नया विवाद
शाहजहांपुर (उप्र) 29 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में शहीदों की प्रतिमाएं बुलडोजर से तोड़ने के बाद कथित तौर पर उन्हीं मूर्तियों को मरम्मत करके दोबारा लगाये जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
इस मामले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नई प्रतिमाएं लगवाने की मांग की है।
शहर के टाउन हॉल स्थित नगर निगम कार्यालय परिसर में लगी शहीद अशफाक उल्ला खान, रोशन लाल और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की प्रतिमाओं को हाल ही में तोड़ने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रतिमाएं लगा दी गई थीं। आरोप है कि प्रशासन ने नयी प्रतिमाएं लगाने के बजाय तोड़ी गयी मूर्तियों की मरम्मत कराकर उन्हें फिर से स्थापित कर दिया है।
‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन’ के अध्यक्ष राजीव कुमार एवं महासचिव विजय तन्हा ने मुख्यमंत्री को इस सिलसिले में भेजे गये एक शिकायती भेजे पत्र में कहा है कि शहीदों की प्रतिमाओं को रात के अंधेरे में तोड़कर 24 घंटे में उन्हीं प्रतिमाओं की मरम्मत कराकर स्थापित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार खंडित प्रतिमाओं का पूजन नहीं किया जाता है लिहाजा शहीदों के प्रति उनकी श्रद्धा का सम्मान रखते हुए नई प्रतिमाएं लगाई जाएं।
उधर, इस मामले में दो अधिकारियों को निलंबित किये जाने को लेकर भी विवाद की स्थिति पैदा हो रही है।
कांग्रेस के जिला समन्वयक पवन कुमार सिंह ने ‘पीटीआई- भाषा’ से कहा कि इस मामले में जिलाधिकारी की संस्तुति पर निलंबित किए गए कनिष्ठ अभियंता प्रमोद कुमार तथा सहायक अभियंता मनोज कुमार छुट्टी पर थे, ऐसे में उन्हें निलंबित करना न्यायसंगत नहीं है।
सिंह ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी ने अपने अधिकारियों को बचाने के लिए आनन-फानन में बिना तथ्यों को जाने दो अभियंताओं को निलंबित करने की सिफारिश कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब लोगों का इस मामले से ध्यान हटाने के लिए किया गया है।
इस बारे में पूछे जाने पर जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी तरफ से कोई सिफारिश नहीं की है बल्कि नगर आयुक्त विपिन कुमार मिश्रा की संस्तुति को ही आगे बढ़ाया था।
नगर आयुक्त मिश्रा ने इस बारे में बताया कि उन्होंने इस मामले में एक पत्र शासन को भेजा था, जिसकी प्रतिलिपि जिलाधिकारी को भी भेजी गई थी। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने इस पत्र को अपनी ओर से शासन को अग्रसारित किया था।
इस बीच, निलंबित किए गए कनिष्ठ अभियंता प्रमोद कुमार ने बताया कि जिस दिन मूर्तियां तोड़ी गई उस दिन वह छुट्टी पर गाजियाबाद में अपने बच्चों के पास थे।
उन्होंने कहा कि मूर्तियां तोड़ने वाले वीडियो में वह खुद कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं और जो निविदा हुई थी वह मूर्ति तोड़ने के लिए नहीं बल्कि मूर्तियों को पीछे हटाकर स्थापित करने के लिए थी। उनका कहना है कि अगर हमें सूचना दी जाती तो वह प्रतिमाओं को कभी तोड़ने नहीं देते।
कुमार ने नगर आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि जब कार्य ठेकेदार से कराया जा रहा था तो फिर नगर निगम के बुलडोजर मूर्तियां तोड़ने में क्यों और किसके आदेश पर प्रयोग किये गये।
भाषा सं सलीम रंजन
रंजन

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