गोरखपुर (उप्र), 28 मार्च (भाषा) देश भर के संस्थानों में वर्तमान में अध्ययनरत 26 देशों के 180 से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने शनिवार को यहां संपन्न दो दिवसीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सम्मेलन में भाग लिया।
एक बयान में कहा गया है कि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मेटा और ‘वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ स्टूडेंट्स एंड यूथ’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय ‘वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन 2026’ शुक्रवार को शुरू हुआ था, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नवाचार और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के बागवानी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा हो रहे ‘‘ज्ञान मंथन’’ की तुलना पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन से की और शोधकर्ताओं से नैतिक मूल्यों तथा वैश्विक कल्याण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को, विशेष रूप से कृषि व चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में हमेशा एक मानवीय सहायक के रूप में ही कार्य करना चाहिए।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने ‘डेटा संप्रभुता’ को लेकर चिंता व्यक्त की और वैश्विक एकाधिकार को रोकने के लिए स्वदेशी एआई मॉडल के निर्माण का आह्वान किया।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन, एआई नवाचार और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर आगे भी विचार-विमर्श जारी रखेगा।
भाषा सं जफर गोला
गोला