गोरखपुर, 11 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि गुलामी के दौर से लेकर आजादी के बाद तक लगातार पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में पलायन करने वाले लोगों ने अवसर मिलने पर अपनी काबिलियत और कड़ी मेहनत के बल पर पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में कहा, ‘‘चाहे मुगल काल हो, अंग्रेजों का शासन हो या आजादी के बाद का समय… यह क्षेत्र लगातार उस त्रासदी का शिकार रहा है। यही वह क्षेत्र है, जहां बीमारी और बंधुआ मजदूरी के कारण बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप मॉरिशस, फिजी या दुनिया के दूसरे देशों में जाएं तो पाएंगे कि वहां मजदूर बनकर गए लोगों में बड़ी संख्या पूर्वी उत्तर प्रदेश के इसी क्षेत्र से थी। ऐसा नहीं है कि उनमें काबिलियत की कमी थी। जब भी उन्हें अवसर मिला, उन्होंने अपनी योग्यता और कड़ी मेहनत के दम पर खुद को साबित किया।’’
आदित्यनाथ ने कहा कि इसी मिट्टी में जन्मे या जिनके पूर्वज यहां जन्मे थे, ऐसे लोग आज दुनिया के अलग-अलग देशों में राष्ट्राध्यक्ष के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर यहां का कोई व्यक्ति मॉरीशस या फिजी में राष्ट्राध्यक्ष बन सकता था तो क्या वह इस क्षेत्र की बीमारी, बेरोजगारी और बाढ़ जैसी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता था? वे कर सकते थे। लेकिन उन्हें मंच नहीं मिला, उन्हें कभी प्रोत्साहित नहीं किया गया। वर्ष 1947 से पहले की स्थिति को समझा जा सकता है, जब देश औपनिवेशिक शासन के अधीन था, लेकिन 1947 के बाद किसने रोका था?’’
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने जिस शासन व्यवस्था को अपनाया, वह संसदीय लोकतंत्र था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सत्तारूढ़ दल और विपक्ष, दोनों से मिलकर बनता है और यह तभी मजबूत होता है जब दोनों इसे मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘यह जनता की उम्मीदों को पूरा करने का आधार है। दूसरे शब्दों में, सामाजिक सीढ़ी के सबसे निचली पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज प्रशासन तक पहुंचनी चाहिए। विपक्ष को अपनी रचनात्मक भूमिका निभाते हुए जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘और अगर उस जिम्मेदारी को निभाते हुए कोई कहे कि मैं लोगों की बात नहीं सुनूंगा, तो क्या उनके लिए लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना संभव है?’’
आदित्यनाथ ने पिछले नौ वर्षों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यह क्षेत्र डेंगू और एन्सेफलाइटिस जैसी बीमारियों से मुक्त हो गया है।
उन्होंने इस बदलाव का श्रेय भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार को दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘एक समय था जब गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज खुद ही बदहाल स्थिति में था। आज वही मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवा के एक नए केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। आज गोरखपुर में एम्स की स्थापना हो चुकी है।’’
आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहले की कानून-व्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘एक समय था जब ‘माफिया’ शब्द की चर्चा पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही शुरू होती थी। माफिया और मच्छर इस क्षेत्र की बड़ी समस्या बन गए थे। माफिया लोगों का खून चूसते थे और मच्छर बीमारियां फैलाते थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय खतरनाक माफिया केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उनके अंतरराष्ट्रीय संबंध भी थे। ये माफिया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए थे।’’ उन्होंने इस मौके पर कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी युवा शक्ति के दम पर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘यहां के लोगों, खासकर युवाओं में कभी भी प्रतिभा या कड़ी मेहनत की कमी नहीं रही। जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की।’’
उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य अपनी अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफल रहा है और इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे पूरा भरोसा है कि अगले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।’’
उन्होंने कहा कि युवाओं पर कोई भी दाग लगाना उचित नहीं है।
आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘अगर राज्य के युवाओं की प्रतिभा और काबिलियत पहले विकास में योगदान नहीं दे पाई, तो इसमें युवाओं की कोई गलती नहीं थी। बल्कि कमी उस व्यवस्था में थी, जो उनकी प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं कर पाई। कमी उन लोगों में थी, जो युवाओं को आगे बढ़ने के लिए मंच और अवसर नहीं दे पाए।’’
उन्होंने कहा कि जब युवाओं को मंच देने वाली सरकार सत्ता में आई तो उनके लिए हर क्षेत्र में अवसर उत्पन्न हुए, जिसके परिणामस्वरूप आज राज्य के युवा हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं।
भाषा अरुणव सलीम आनन्द जितेंद्र
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