राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति मामले से जुड़ी याचिका पर हुई सुनवाई

राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति मामले से जुड़ी याचिका पर हुई सुनवाई

राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति मामले से जुड़ी याचिका पर हुई सुनवाई
Modified Date: July 20, 2026 / 10:26 pm IST
Published Date: July 20, 2026 10:26 pm IST

लखनऊ, 20 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने के आदेश देने का आग्रह करने वाली याचिका पर सोमवार को चैंबर में करीब दो घंटे तक सुनवाई की।

खबर लिखे जाने तक उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर पीठ का आदेश उपलब्ध नहीं था। हालांकि, वेबसाइट पर यह दिखाया गया है कि मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

न्यायमूर्ति आर. एस. चौहान और न्यायमूर्ति बी. आर. सिंह की खंडपीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर यह सुनवाई की।

याचिकाकर्ता ने गांधी पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है और इस मामले की सीबीआई और ईडी से जांच की मांग की है।

पीठ ने अपने पिछले आदेश में कहा था, ‘‘उम्मीद की जाती है कि अगर याचिकाकर्ता की शिकायत मिल गई है तो शिकायत के आरोपों की कानून के अनुसार जांच की जा सकती है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि सीबीआई या ईडी कानून के तहत उचित कदम उठा सकती हैं।”

पीठ ने सीबीआई और ईडी के अलावा केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) के निदेशक को भी निर्देश दिया था कि वह गांधी के खिलाफ याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें।

पीठ ने इससे पहले गत 12 मई को मामले की सुनवाई चैंबर में की थी और उसका आदेश 14 मई को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध था।

आदेश में कहा गया था कि सीबीआई ने पीठ को सूचित किया है कि उसे याचिकाकर्ता की शिकायत मिल गई है और वह आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगी।

आदेश में यह भी कहा गया था कि इसी तरह ईडी ने भी पीठ को सूचित किया था कि उसे शिकायत मिल गई है और वह आरोपों की जांच कर सकती है और उसके बाद 20 जुलाई को अदालत को इसकी प्रगति के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

पीठ ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों से जवाब मांगते हुए कहा था, ”प्रति शपथपत्र के रूप में जवाब दाखिल करके याचिकाकर्ता द्वारा इन एजेंसियों को सौंपी गई शिकायत के संबंध में हुई प्रगति के बारे में अदालत को जानकारी दी जा सकती है।”

इस सवाल पर कि यह याचिका सुनवाई के लायक है या नहीं, पीठ ने कहा था कि संबंधित पक्षों के जवाबी हलफनामे और उन पर प्रत्युत्तर मिलने के बाद ही इस दलील की जांच की जाएगी।

अदालत ने इसके अलावा अपने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए ‘पेपर-बुक’ और अलग-अलग दस्तावेजों को एक सीलबंद लिफाफे में रखा जाए और उसे 20 जुलाई को खोला जाए।

भाषा सं. सलीम धीरज

धीरज


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