उच्च न्यायालय ने लगायी उप्र आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार

उच्च न्यायालय ने लगायी उप्र आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार

उच्च न्यायालय ने लगायी उप्र आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार
Modified Date: August 24, 2026 / 10:10 pm IST
Published Date: August 24, 2026 10:10 pm IST

लखनऊ, 24 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को ‘उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक अधिकरण’ (यूपी रेरा) के आदेश के अनुपालन में विलंब करने और फिर वसूली प्रमाणपत्र में बतायी गयी रकम से कम का चेक जारी करने पर कड़ी फटकार लगायी।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारी यूपी रेरा और उच्च न्यायालय की कार्यवाही को गम्भीरता से नहीं ले रहे हैं।

खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के आवास आयुक्त को मंगलवार पूर्वाह्न 10 बजकर 15 मिनट पर ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग’ के जरिये पेश होने और इस बात का स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया कि कम रकम का चेक क्यों जारी किया गया।

यह प्रकरण अशोक कुमार सिंह नामक व्यक्ति द्वारा यूपी रेरा में की शिकायत से जुड़ा है। रेरा ने 29 जुलाई 2025 को शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था।

यूपी रेरा ने प्रवर्तन की कार्यवाही के दौरान 27 मई 2026 को 26 लाख 58 हजार 806.01 रुपये का वसूली प्रमाणपत्र जारी किया। हालांकि, राजस्व अधिकारियों ने वसूली की कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया, जिसके बाद सिंह ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

उच्च न्यायालय ने गत सात अगस्त को उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को निर्देश दिया था कि वे रेरा के आदेश के तहत देय रकम 10 दिनों के भीतर जमा करें। अदालत ने साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो आवास आयुक्त को पेश होना पड़ेगा।

परिषद ने सोमवार को अदालत में अनुपालन सम्बन्धी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के रजिस्ट्रार के नाम 23 लाख 71 हजार 126 रुपये का चेक तैयार किया गया है और इसे याचिकाकर्ता के वकील को सौंपा जा रहा है।

इस पर पीठ ने सवाल किया कि चेक 23 लाख 71 हजार रुपये का क्यों है, जबकि जारी वसूली प्रमाणपत्र में 26 लाख 58 लाख रुपये की रकम बताई गई थी।

आवास विकास परिषद के वकील ने इसके जवाब में कहा कि विभाग ने रकम की गणना खुद की थी। इस पर अदालत ने सवाल किया कि परिषद किसी कानूनी अधिकरण द्वारा जारी वसूली प्रमाणपत्र में बताई गई रकम के उलट अपनी तरफ से धनराशि की गणना कैसे कर सकती है।

इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिये जाने पर पीठ ने आवास विकास परिषद को फटकार लगायी।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार


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