लखनऊ, 12 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले साढ़े नौ साल में 84,005 हेक्टेयर से अधिक (2.08 लाख एकड़) भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है।
प्रदेश के राजस्व विभाग ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के साथ शिकायतों के निस्तारण, मुकदमों की पैरवी और चिह्नित भू-माफिया के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई से इस अभियान को और व्यापक बनाया गया है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में सार्वजनिक संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्य, मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर चार स्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
इसका उद्देश्य अवैध कब्जों की पहचान से लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।
बयान के मुताबिक, अवैध कब्जों से संबंधित शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कराने और उन पर की गई कार्रवाई की प्रभावी निगरानी के लिए एंटी भू-माफिया पोर्टल विकसित किया गया है।
प्रदेश में इस पोर्टल पर अवैध कब्जे से संबंधित कुल 4,34,016 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 4,31,697 यानी 99 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। वहीं, 2,319 शिकायतें निस्तारण के लिए लंबित हैं।
बयान में कहा गया कि व्यापक स्तर पर भू-माफिया से भूमि मुक्त कराए जाने से बड़े पैमाने पर सरकारी ‘लैंड बैंक’ तैयार हुआ है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न विकास योजनाओं के लिए किया जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में इन अभियानों के तहत 25,068 राजस्व वाद, 1,168 दीवानी वाद और 4,751 प्राथमिकी दर्ज कराई गईं। वहीं, अभियान के तहत 1,413 अतिक्रमणकारियों को भू-माफिया के रूप में चिह्नित किया गया, जिनमें से 144 वर्तमान में जेल में बंद हैं।
राजस्व विभाग के मुताबिक, 1,621 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत मामले दर्ज किए गए, जबकि 109 लोगों के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत तीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इसी तरह, गैंगस्टर एक्ट के तहत 70 और गुंडा एक्ट के तहत 206 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
भाषा
राजेंद्र रवि कांत