जौहर विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराने का आदेश ‘राजनीति से प्रेरित’ : तजीन फातिमा

जौहर विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराने का आदेश ‘राजनीति से प्रेरित’ : तजीन फातिमा

जौहर विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराने का आदेश ‘राजनीति से प्रेरित’ : तजीन फातिमा
Modified Date: July 16, 2026 / 10:02 pm IST
Published Date: July 16, 2026 10:02 pm IST

रामपुर, 16 जुलाई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान की पत्नी और पूर्व राज्यसभा सदस्य तजीन फातिमा ने बृहस्पतिवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश को “राजनीति से प्रेरित” बताया।

फातिमा ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की कानूनी रणनीति पर प्रबंधन और सपा नेताओं के साथ बातचीत की।

उन्होंने प्रशासन पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अदालत के आदेश के तहत विश्वविद्यालय को स्वेच्छा से ध्वस्तीकरण के लिए 15 दिन का समय दिया गया है और अधिकारियों को उस समय-सीमा का सम्मान करना चाहिए।

फातिमा ने संवाददाताओं से कहा, “हमारे पास अदालत का स्पष्ट आदेश है, जिसमें हमें 15 दिन का समय दिया गया है। यह पूरी कार्रवाई गलत इरादे से की जा रही है।”

रामपुर विकास प्राधिकरण ने बुधवार को नक्शा स्वीकृत कराए बगैर बनवाए जाने का दावा करते हुए जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। हालांकि, विश्वविद्यालय पक्ष का कहना है कि जब ये इमारतें बनी थीं, तब वह इलाका प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। लेकिन प्राधिकरण ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

आजम के करीबी स्थानीय सपा नेता आसिम राजा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 15 जुलाई के नोटिस का जवाब दे दिया था और सुनवाई के लिए उसके नुमाइंदे अधिकारियों के सामने पेश भी हुए थे, लेकिन फैसला पहले से ही तय था।

राजा ने कहा, “हमारी बातें सुनी गईं, लेकिन उन्हें खारिज करते हुए 10 मिनट के अंदर ही फैसला सुना दिया गया और तुरंत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई। इससे पता चलता है कि नतीजा पहले ही तय हो चुका था।”

उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय को कानूनी उपाय करने के लिए 15 दिन का समय देने के आदेश के बावजूद आदेश के तुरंत बाद विश्वविद्यालय परिसर में “गैरकानूनी” ढंग से पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी राज्य सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि किसी शिक्षण संस्थान को गिराना छात्रों और युवाओं के भविष्य पर “बुलडोज चलाने” जैसा है।

इस कार्रवाई को आजम के प्रति “राजनीतिक दुश्मनी” का नतीजा बताते हुए मसूद ने कहा कि अगर निर्माण में कोई उल्लंघन हुआ था, तो शमन शुल्क लेने जैसे कानूनी विकल्प मौजूद थे।

हालांकि, कन्नौज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि जब आजम सत्ता में थे, तो वह खुद को “राजा” समझते थे।

उन्होंने कहा कि इमारतों को तोड़ने का आदेश तब आया, जब प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विश्वविद्यालय परिसर से गुजरने वाली तीन किलोमीटर लंबी चार-लेन वाली सड़क को सार्वजनिक सड़क घोषित कर दिया और साइनबोर्ड लगाकर बताया कि यह आम जनता के इस्तेमाल के लिए खुली है।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के शासनकाल में जनता के धन से बनी यह सड़क लंबे समय से कानूनी विवाद का केंद्र रही है और यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है।

इससे पहले, अखिलेश ने जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को तोड़ने के आदेश की निंदा की। उन्होंने भाजपा पर शिक्षा को “सांप्रदायिक” नजरिये से देखने का आरोप लगाया और विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाए।

वर्ष 2006 में स्थापित यह विश्वविद्यालय हाल के वर्षों में जमीन पर कब्जे, पट्टा नियमों के उल्लंघन और निर्माण संबंधी मंजूरी से जुड़े कई कानूनी विवादों में उलझा रहा है।

भाषा

सं. सलीम पारुल

पारुल


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