लखनऊ, नौ जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) ने यौन शोषण, धर्म परिवर्तन और ‘लव जिहाद’ के आरोपी एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को बर्खास्त करने की सिफारिश की है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
शुक्रवार को इस मुद्दे पर केजीएमयू परिसर में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि जूनियर रेजिडेंट डॉ. रमीजुद्दीन उर्फ रमीज मलिक के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए सात सदस्यीय एक आंतरिक समिति का गठन किया गया था जिसने शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सच पाया है।
उन्होंने कहा कि समिति द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गयी जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉक्टर को हटाने के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीएमई) को एक प्रस्ताव भेजा है।
कुलपति ने कहा कि डीजीएमई से उम्मीद है कि वह उसके जूनियर रेजिडेंसी एडमिशन रद्द करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को लिखेगा।
प्रो. नित्यानंद ने कहा, ”डॉ. रमीजुद्दीन फरार है और अब किसी भी हाल में केजीएमयू का हिस्सा नहीं रहेगा।’
उन्होंने कहा कि उसे 22 दिसंबर 2025 को निलंबित कर दिया गया था और केजीएमयू परिसर में आने पर रोक लगा दी गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी समिति के सामने सिर्फ एक बार पेश हुआ और दावा किया कि शिकायतकर्ता के साथ रिश्ता आपसी सहमति से था। उसने शादीशुदा होने से भी इनकार किया।
हालांकि समिति ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता, डॉक्टरों, स्टाफ सदस्यों के बयानों और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर आरोप सही साबित हुए।
इस बीच, शुक्रवार को केजीएमयू में तब तनाव फैल गया जब बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय में घुसने की कोशिश की, नारे लगाए और विश्वविद्यालय प्रशासन पर मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया।
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने दरवाजे और खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की और कुलपति के खिलाफ नारे लगाए।
अधिकारियों ने बताया कि हंगामे के बाद प्रो. नित्यानंद कार्यालय से चली गईं। यह घटना तब हुई जब डॉक्टर भर्ती के लिए साक्षात्कार चल रहा था, जिससे आने वाले विशेषज्ञ और स्टाफ को परिसर छोड़ना पड़ा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब समिति के कुछ सदस्यों को कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया, जिसके बाद ठाकुरगंज और चौक थानों से बड़ी संख्या में पुलिस परिसर पहुंची।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस के दखल के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव भी अशांति की सूचना मिलने के बाद परिसर पहुंचीं। बाद में यादव ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि केजीएमयू प्रशासन शिकायत पर ठीक से जवाब देने में नाकाम रहा और उन्होंने मामले को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए।
यादव ने आरोप लगाया, ‘पीड़िता ने वरिष्ठ अधिकारियों को कथित शोषण के बारे में बताया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। ‘
यादव ने आरोप लगाया कि गवाहों पर बयान बदलने के लिए दबाव डाला जा रहा था।
आरोपी डॉक्टर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के साथ ही उसकी गिरफ्तारी की जानकारी देने वाले को 50,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई है।
शिकायतकर्ता, एक महिला डॉक्टर ने आरोपी पर अपनी शादी छिपाने, शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण करने, उसे जबरन गर्भपात कराने, उसे धमकी देने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने बताया कि 22 दिसंबर को बलात्कार, आपराधिक धमकी और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय और पुलिस स्तर पर कथित धर्म परिवर्तन और संबंधित गतिविधियों की अलग-अलग जांच भी चल रही है।
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) विश्वजीत श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपी के माता-पिता को पांच जनवरी को कथित धर्म परिवर्तन मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, जबकि उसकी संपत्तियों को जब्त करने के नोटिस लखनऊ में उसके घर और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उसके परिवार से जुड़े स्थानों पर चिपकाए गए थे।
भाषा चंदन आनन्द
राजकुमार
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