ढाका, 17 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश के चुनाव में विजयी हुई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में शपथ लेने से इनकार करने के बाद दक्षिणपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नव निर्वाचित संसद सदस्यों ने मंगलवार को शपथ लेने से मना कर दिया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नसीरुद्दीन ने संसद भवन (जातीय संसद भवन) में बीएनपी सांसदों को पद की शपथ दिलाई। इसके बाद जमात के सांसदों को शपथ लेनी थी।
जब बीएनपी ने जनमत-संग्रह का समर्थन करने के लिए ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्यों के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया तो स्थिति जटिल हो गई।
जमात के उपाध्यक्ष अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर ने कहा, ‘‘जब तक बीएनपी के सांसद नियमित संसद सदस्यों के साथ ही ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्यों के रूप में शपथ नहीं लेते, हम संसद सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण नहीं करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि संवैधानिक सुधारों के बिना संसद बेकार है।
‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में दूसरी शपथ तथाकथित ‘जुलाई चार्टर’ को लागू करने की प्रतिबद्धता से जुड़ी है, जिसमें संविधान में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। जनमत-संग्रह में 84 सूत्री जटिल प्रस्ताव रखा गया था।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, जनमत-संग्रह में 60 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने ‘हां’ में मतदान किया।
बीएनपी की नीति-निर्धारण स्थायी समिति के सदस्य और नवनिर्वाचित सांसद सलाहुद्दीन अहमद ने शपथ ग्रहण से पहले पार्टी सांसदों से कहा कि उन्हें संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में निर्वाचित नहीं किया गया है और अभी तक परिषद से संबंधित कोई प्रावधान संविधान में शामिल नहीं किया गया है।
पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान की मौजूदगी में उन्होंने कहा, “हममें से कोई भी दूसरी शपथ नहीं लेगा।”
अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से वंचित किए जाने के बाद हुए 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतीं।
भाषा वैभव मनीषा
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