Lakhimpur Kheri News | Photo Credit: AI
लखीमपुर खीरी: Lakhimpur Kheri News कभी-कभी अदालतों में ऐसे मामले सामने आते हैं, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगते। एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला लखीमपुर खीरी से सामने आया है। (Court Shocking Case) जहां सालों पुराना विवाद अचानक फिर सुर्खियों में आ गया।
Lakhimpur Kheri Court Case मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। दरअसल, 17 साल पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने मालखाने में जमा सोने के जेवर उनके मालिक को लौटाने का आदेश दिया था, लेकिन जब जेवर वापस करने की बारी आई तो पुलिस ने दावा किया कि मालखाने में रखी सोने की पोटली बारिश में भीग गई थी और उसे सुखाने के लिए छत पर रखा गया था। इसी दौरान बंदर पोटली उठाकर ले गए। (Gold Jewellery Missing Case) पुलिस की बात सुनकर अदालत के भी होश उड़ गए।
मामला साल 2007 की है। जहां दीपावली की रात शहर के कपूरथला मोहल्ले में रहने वाली रानी अग्रवाल उर्फ जूली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान उनके शरीर से उतारे गए सोने के बहुमूल्य आभूषण पुलिस को सुपुर्द किए गए थे। इनमें सोने की चेन, लॉकेट, अंगूठी, नाक की कील और कई भारी चूड़ियां शामिल थीं। इन सभी आभूषणों को पुलिस ने मालखाने में सुरक्षित रखने का दावा किया था, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ रुपए बताई गई है। मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन रहा।
हाल ही में अदालत ने संबंधित पक्ष को मालखाने में जमा जेवर वापस करने का आदेश दिया। जब आदेश का पालन करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो पता चल की मालखाने में जमा सोने का अभूषण गायब हो गया। इसके बाद अदालत ने पुलिस से जवाब मांगा। जवाब में पुलिस ने कहा कि मालखाने में रखी सोने की जेवरात की पोटली बारिश की वजह से गिली हो गई थी और जब उसे छत पर सुखाने के लिए रखा तो बंदरों का एक झुंड वहां पहुंचा और सोने की पोटली उठाकर ले गया। काफी तलाश के बावजूद पोटली नहीं मिल सकी। पुलिस की ये बात सुनकर अदालत के होश उड़ गए।
अदालत ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि सोना पानी में नहीं गलता और करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति को खुले में छोड़ देना किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था का हिस्सा नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि बहुमूल्य आभूषणों के साथ छेड़छाड़ की गई और रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर मामले को दबाने की कोशिश हुई। अदालत ने जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश देकर संकेत दे दिया है कि जवाबदेही तय किए बिना यह मामला समाप्त नहीं होगा।