लखनऊ, 16 जनवरी (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को हजरतगंज में किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में कथित अवैध धर्मांतरण गतिविधियों का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ जल्द और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
बड़ी संख्या में विहिप के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और ‘लव जिहाद बंद करो’ जैसे नारे लगाए।
उन्होंने अधिकारियों पर केजीएमयू परिसर में संदिग्ध गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच कर रहे विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से जांच में तेजी लाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
विहिप के स्थानीय नेता विजय प्रताप ने आरोप लगाया कि ये घटनाएं धर्मांतरण के एक संगठित प्रयास की ओर इशारा करती हैं।
उन्होंने कहा, ‘विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के प्रयासों से यह खुलासा हुआ है। इस साजिश के पीछे और भी लोग हैं जिन्हें सजा मिलनी चाहिए।’
उन्होंने केजीएमयू के कुछ अधिकारियों को हटाने और पूरे मामले की व्यापक जांच की भी मांग की।
यह विरोध प्रदर्शन कैसरबाग पुलिस द्वारा एक नर्सिंग छात्रा से कथित बलात्कार और ब्लैकमेल के मामले में केजीएमयू के इंटर्न मोहम्मद आदिल को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद हुआ।
पुलिस ने बताया कि आदिल केजीएमयू में इंटर्नशिप करता है और कैसरबाग के एक फ्लैट में रह रहा था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसने छात्रा से दोस्ती की, शादी का वादा करके उसका कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया और आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए।
अधिकारी ने बताया कि जब उसने शादी का दबाव डाला तो छात्रा ने मना कर दिया, और आदिल ने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। 29 दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई और बाद में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले के केजीएमयू यौन शोषण और कथित धर्मांतरण मामले के साथ समान पहलू हैं, लेकिन अब तक कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आदिल का डॉ. रमीजुद्दीन से कोई संबंध था, जो फिलहाल जेल में हैं।
इस महीने की शुरुआत में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नाइक को शादी का वादा करके महिला डॉक्टर का यौन शोषण करने, उसे गर्भपात के लिए मजबूर करने और धर्म बदलने के लिए दबाव डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले को संभावित संगठित धर्म परिवर्तन गिरोह के रूप में देख रही है।
केजीएमयू ने आंतरिक जांच के बाद डॉ. नाइक पर आरोपों को सच पाया और उन्हें एमडी कोर्स से हटा दिया। कुलपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जांच के नतीजों और की गई कार्रवाई से अवगत कराया।
पुलिस ने पीलीभीत के एक मुस्लिम मौलवी से भी पूछताछ की है और घटनाओं के क्रम तथा अन्य संभावित संलिप्त लोगों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी रखी है।
भाषा किशोर जफर खारी
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