मिशन वात्सल्य के तहत समय पर धनराशि जारी करने की व्यवस्था बनाएं: अदालत का सरकार को निर्देश

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मिशन वात्सल्य के तहत समय पर धनराशि जारी करने की व्यवस्था बनाएं: अदालत का सरकार को निर्देश

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 11:49 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 11:49 PM IST

लखनऊ, 11 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने मिशन वात्सल्य योजना के तहत बाल देखभाल संस्थानों को धनराशि जारी करने में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बच्चों के कल्याण से जुड़े मामलों में अस्थायी व्यवस्था के बजाय स्थायी व समयबद्ध तंत्र जरूरी है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने आठ मई को जारी आदेश में यह टिप्पणी आश्रय गृहों में रह रहे बच्चों के कल्याण से संबंधित 2008 से लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की।

इस मामले में अगली सुनवाई 27 मई को होगी।

सरकार ने अदालत को बताया कि दृष्टि सामाजिक संस्थान को एक करोड़ रुपये की सहायता परियोजना अनुमोदन बोर्ड की बैठक के बाद ही जारी हो सकेगी, जो अब 12 मई को प्रस्तावित है।

पहले यह बैठक 27 अप्रैल को होनी थी।

अदालत को यह भी बताया गया कि स्पर्श योजना के तहत भुगतान की व्यवस्था अब जिला स्तर पर करने का प्रस्ताव है जो कि पहले राष्ट्रीय स्तर की केंद्रीकृत साइबर कोषागार प्रणाली से होता था और इससे दिक्कतें आ रही थीं।

हालांकि चालू वित्तीय वर्ष का अनुमोदन अभी भी बोर्ड की बैठक पर निर्भर है।

पीठ ने कहा कि वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरू हो चुका है, ऐसे में बोर्ड की बैठक पहले होनी चाहिए थी, यदि बच्चों के लिए निर्धारित निधि समय पर नहीं मिली तो योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि संस्था को बच्चों की देखभाल के लिए बाजार से कर्ज लेना पड़ा है और अब लेनदार मदद को तैयार नहीं हैं।

पीठ ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि भविष्य में परियोजना अनुमोदन बोर्ड की बैठकें समय से पहले आयोजित कर धनराशि का वितरण किया जाए।

भाषा सं आनन्द खारी

खारी