holika mathura/ image source: ANI X HANDLE
Mathura Holika Dahan Viral Video: मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा से होलिका दहन की एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। ब्रज क्षेत्र के कोसीकलां के पास स्थित फालेन गांव में सदियों पुरानी परंपरा के तहत एक व्यक्ति प्रह्लाद का रूप धारण कर जलती हुई होलिका की अग्नि के बीच से गुजरता है। इस वर्ष भी मंगलवार तड़के करीब 4 बजे जब होलिका की लपटें आसमान छू रही थीं, तब संजू पांडा नामक युवक दहकते अंगारों के बीच दौड़ते हुए निकल गया। आश्चर्य की बात यह रही कि इतनी भीषण आग के बावजूद उसके शरीर पर झुलसने का कोई निशान नहीं दिखा।
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फालेन गांव की यह परंपरा करीब 5200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भक्त प्रह्लाद को जलाने के प्रयास विफल हुए थे। तभी से यहां होलिका दहन के अवसर पर यह अनूठी रस्म निभाई जाती है। ग्रामीण इसे आस्था और अटूट विश्वास की परीक्षा मानते हैं।
इस परंपरा को निभाने वाले संजू पांडा पिछले 45 दिनों से गांव के प्रह्लाद मंदिर में कठोर तपस्या कर रहे थे। उन्होंने जमीन पर सोना, केवल फलाहार ग्रहण करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना जैसे नियमों का पालन किया। उनका कहना है कि इसकी तैयारी बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है। इस दौरान वे घर-परिवार से मोह त्यागकर साधना में लीन रहते हैं और नियमित भोजन भी नहीं करते।
परंपरा के अनुसार, होलिका दहन से पहले संजू ने मंदिर की ज्योति पर हाथ रखकर देवी संकेत का इंतजार किया। जैसे ही उन्हें ज्योति में शीतलता का अनुभव हुआ, उन्होंने आग में प्रवेश का संकेत दे दिया। उनकी बहन रजनी ने जलती हुई होली पर कलश से अर्ध्य देकर जल की धारा प्रवाहित की। इसके बाद संजू ने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और सीधे जलती लपटों में कूद पड़े। उपस्थित लोग सांसें थामे यह दृश्य देखते रहे।
आग से सुरक्षित बाहर आने के बाद संजू पांडा ने कहा, “यह मेरा कोई चमत्कार नहीं है, यह साक्षात प्रह्लाद जी की कृपा है। जब मैं अग्नि में होता हूं तो बाल रूप में प्रभु प्रह्लाद मेरे आगे-आगे चलते हैं और मुझे आग का ताप महसूस नहीं होता।” ग्रामीण भी इसे भगवान नरसिंह का आशीर्वाद मानते हैं और कहते हैं कि प्रह्लाद जी के वंशज इस परंपरा को पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं।
संजू के परिवार का इस परंपरा से गहरा नाता है। उनके पिता सुशील पांडा आठ बार और बड़े भाई मोनू पांडा चार बार जलती होली से सुरक्षित निकल चुके हैं। इस वर्ष का दृश्य देखने के लिए जर्मनी, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से विदेशी पर्यटक भी पहुंचे थे। वे इस अद्भुत परंपरा को देखकर आश्चर्यचकित रह गए।