लखनऊ, 28 जनवरी (भाषा) बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध ‘‘बिल्कुल भी उचित नहीं है’’।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था।
मायावती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा सरकारी कॉलेज और निजी विश्वविद्यालयों में समता समिति बनाने के नए नियम के कुछ प्रावधानों का केवल जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग ही विरोध कर रहे हैं, इसे भेदभाव और षड्यंत्र मानना कतई उचित नहीं है।”
उन्होंने कहा, “पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए था, जिससे सामाजिक तनाव पैदा नहीं होता। सरकारों और सभी संस्थानों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।”
बसपा नेता ने कहा, “ऐसे मामलों में दलित और पिछड़े वर्ग के लोग भी इन वर्गों के स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में नहीं आएं, जो आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं। इन वर्गों के लोगों को सावधान रहना चाहिए।”
उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है, ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
भाषा जफर संतोष खारी
खारी