बारा (पाकिस्तान), 28 जनवरी (एपी) पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ सैन्य अभियान की आशंका के कारण अफगानिस्तान की सीमा से लगे उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के एक दूरस्थ क्षेत्र से 70,000 से अधिक लोग पलायन कर गए हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने निवासियों और प्रांतीय अधिकारियों के दावों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के तिराह शहर में कोई सैन्य अभियान न तो जारी है और न ही ऐसी कोई योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने इस्लामाबाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सैन्य कार्रवाई के बजाय खराब मौसम पलायन का कारण है। उनकी यह टिप्पणी तिराह के निवासियों द्वारा संभावित सैन्य अभियान के डर से पलायन शुरू करने के कुछ सप्ताह बाद आई है।
यह पलायन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब मस्जिदों के लाउडस्पीकर ने निवासियों से संभावित संघर्ष से बचने के लिए 23 जनवरी तक तिराह छोड़ने का आग्रह किया था। पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान ने उत्तर-पश्चिम के बाजौर जिले में पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसके कारण लाखों लोग विस्थापित हुए थे।
खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता शफी जान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर विस्थापित लोगों की दुर्दशा के लिए संघीय सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इस्लामाबाद के अधिकारी सैन्य अभियान के बारे में अपने पहले के रुख से पीछे हट रहे हैं।
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने सेना की आलोचना करते हुए कहा है कि उनकी सरकार सैनिकों को तिराह में पूर्ण पैमाने पर अभियान शुरू करने की अनुमति नहीं देगी। अफरीदी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता हैं जिनकी पार्टी का नेतृत्व जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कर रहे हैं।
सेना का कहना है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी के नाम से मशहूर पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान जारी रखेगी।
अधिकारियों का कहना है कि टीटीपी के कई नेताओं और लड़ाकों ने अफगानिस्तान में शरण ली है और उनमें से सैकड़ों तिराह में घुस गए हैं तथा अक्सर आतंकवादी ठिकानों पर छापेमारी के दौरान निवासियों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
राहत कार्य पर नजर रख रहे स्थानीय सरकारी प्रशासक तलहा रफीक आलम ने बताया कि अब तक स्थानीय अधिकारियों ने तिराह से लगभग 10,000 परिवारों (लगभग 70,000 लोग) को दर्ज किया है। तिराह लगभग 150,000 लोगों की आबादी वाला इलाका है। आलम ने कहा कि पंजीकरण की अंतिम तिथि मूल रूप से 23 जनवरी निर्धारित की गई थी जिसे बढ़ाकर पांच फरवरी कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार होने पर विस्थापित लोग वापस लौट सकेंगे।
एपी सुरभि मनीषा
मनीषा