UGC New Rules Against Caste Discrimination: भाजपा को बड़ा झटका, एक साथ 11 नेताओं ने दिया इस्तीफा, पार्टी छोड़ने वालों में इन दिग्गजों का नाम शामिल

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UGC New Rules Against Caste Discrimination: भाजपा को बड़ा झटका, एक साथ 11 नेताओं ने दिया इस्तीफा, पार्टी छोड़ने वालों में इन दिग्गजों का नाम शामिल

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 10:02 AM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 10:03 AM IST

UGC New Rules Against Caste Discrimination: भाजपा को बड़ा झटका, एक 11 नेताओं ने दिया इस्तीफा / Image: IBC24 Customized

HIGHLIGHTS
  • मंडल महामंत्री समेत 11 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया
  • बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा देकर खलबली मचा दी
  • 2020 से 2025 के बीच जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 100% की वृद्धि हुई

लखनऊ: UGC New Rules Against Caste Discrimination यूजीसी यानि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों में किए गए संशोधन के बाद देश भर में बवाल मचा हुआ है। जहां एक ओर छात्र नए नियमों का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है। नए नियमों के विरोध में उत्तर प्रदेश के बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, अब भाजपा में भी इन नियमों को लेकर नेताओं में बागी तेवर देखने को मिल रहे हैं। खबर आ रही है कि 11 भाजपा नेताओं ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

यूजीसी के नियमों को लेकर भारी विरोध

UGC New Rules Against Caste Discrimination मिली जानकारी के अनुसार बीकेटी विधानसभा क्षेत्र के कुम्हरावां मंडल के महामंत्री समेत 11 पदाधिकारियों के सामूहिक रूप से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि इन सभी ने​ताओं ने यूजीसी के नियमों से आहत होकर इस्तीफा दिया है। मंडल महामंत्री अंकित तिवारी और मंडल मंत्री महावीर सिंह ने जिलाध्यक्ष को लिखे गये इस्तीफे की पुष्टि कर दी है।

11 नेताओं ने एक साथ दिया इस्तीफा

क्र.सं. नेता का नाम पद (पार्टी संगठन में)
1. अंकित तिवारी मंडल महामंत्री
2. महावीर सिंह मंडल मंत्री
3. आलोक सिंह मंडल उपाध्यक्ष
4. मोहित मिश्र शक्ति केंद्र संयोजक
5. वेद प्रकाश सिंह पदाधिकारी
6. नीरज पांडेय पदाधिकारी
7. अनूप सिंह युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष
8. राज विक्रम सिंह मंडल महामंत्री
9. अभिषेक अवस्थी पूर्व मंडल मंत्री
10. विवेक सिंह बूथ अध्यक्ष
11. (नाम प्रतीक्षित) पूर्व सेक्टर संयोजक

UGC किन नियमों को लेकर मचा है बवाल?

यूजीसी का कहना है कि नए नियम की जरूरत एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना और उस पर निगरानी रखना है। नए Equity Rule के तहत सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में 24×7 हेल्पलाइन, Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा। अगर कोई भी संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी उनकी मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई कर सकता है।

नए नियमों में क्या परेशानी हो रही?

यूजीसी के इस नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है। इस पीआईएल में इस नियम को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया गया है। याचिकाकर्ता ने बताया है कि यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी को जिस नए नियम को अधिसूचित किया है उसका 3(C) भेदभाव बढ़ाने वाला है. याचिकाकर्ता ने इस नियम को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।

क्या कहा याचिकाकर्ता ने?

जनहित याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के Equity Rule का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह नियम यूजीसी अधिनियम 1956 के विरुद्ध है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के अवसर को खत्म करता है। इसी तरह के साथ याचिका में इन प्रावधानों को हटाने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है। यूजीसी के अनुसार इस नए नियम की जरूरत उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़ी और अनुसूचित जाति और जनजातियों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव के मामले को रोकने के लिए पड़ी। 2020 से 2025 के बीच जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई थी। इसके अलावा इस नियम को बनाने के पीछे रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को भी वजह बताया गया।

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भाजपा के किन नेताओं ने इस्तीफा दिया है?

बीकेटी के कुम्हरावां मंडल के महामंत्री अंकित तिवारी, मंडल मंत्री महावीर सिंह, उपाध्यक्ष आलोक सिंह और युवा मोर्चा अध्यक्ष अनूप सिंह समेत कुल 11 नेताओं ने सामूहिक इस्तीफा दिया है।

यूजीसी के नए 'इक्विटी नियम' (Equity Rules) क्या हैं?

ये नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं। इसके तहत संस्थानों में हेल्पलाइन और इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य है।

सेक्शन 3(C) को लेकर विवाद क्यों है?

याचिकाकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सेक्शन 3(C) बहुत अस्पष्ट और भेदभावपूर्ण है। यह कथित तौर पर संस्थानों की स्वायत्तता खत्म करता है और सामान्य वर्ग के हितों को प्रभावित कर सकता है।

प्रशासन में इस नियम का क्या असर दिखा?

प्रशासनिक स्तर पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपना इस्तीफा सौंपकर इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई है?

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में इन नियमों को 'असंवैधानिक' और यूजीसी अधिनियम 1956 के विरुद्ध बताया गया है। कोर्ट से इन प्रावधानों को रद्द करने की मांग की गई है।