रामपुर तिराहा गोलीकांड : झूठे मुकदमे दर्ज करने के मामले में तीन पुलिसकर्मी दोषी करार

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रामपुर तिराहा गोलीकांड : झूठे मुकदमे दर्ज करने के मामले में तीन पुलिसकर्मी दोषी करार

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 10:32 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 10:32 PM IST

मुजफ्फरनगर, 30 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर की विशेष सीबीआई अदालत ने वर्ष 1994 के रामपुर तिराहा पुलिस गोलीकांड से जुड़े मामले में अलग उत्तरांचल राज्य की मांग करने वाले आंदोलनकारियों को झूठे मामलों में फंसाने और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर करने के आरोप में एक पूर्व थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को मंगलवार को दोषी ठहराते हुए डेढ़ वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

विशेष न्यायाधीश देवेंद्र कुमार फौजदार ने भारतीय दंड संहिता की धारा 182 (सरकारी कर्मचारी को झूठी सूचना देकर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास), धारा 211 (झूठा आरोप लगाना) और धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत झिंझाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष बृज किशोर तथा सेवानिवृत्त सिपाहियों उमेश चंद और अनिल कुमार को दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों पर 16-16 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के लोक अभियोजक धरा सिंह ने बताया कि जांच एजेंसी ने इस मामले में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

सुनवाई के दौरान हालांकि एक आरोपी सिपाही की मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सीबीआई जांच में पाया गया था कि पुलिस अधिकारियों ने रामपुर तिराहा पर हुई पुलिस गोलीबारी को उचित ठहराने के लिए अलग उत्तरांचल राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाया और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की।

उल्लेखनीय है कि रामपुर तिराहा गोलीकांड दो अक्टूबर 1994 को हुआ था। उस दिन ऋषिकेश से दिल्ली जा रहे पृथक उत्तरांचल राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर पुलिस ने रोक लिया था। इसके बाद हुई गोलीबारी में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी, जबकि कई महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी सामने आई थीं।

भाषा

सं, सलीम रवि कांत