2027 क्या, 2047 तक भी सैफई परिवार का मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा ही रहेगा: मौर्य

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2027 क्या, 2047 तक भी सैफई परिवार का मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा ही रहेगा: मौर्य

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  • Publish Date - May 3, 2026 / 04:55 PM IST,
    Updated On - May 3, 2026 / 04:55 PM IST

लखनऊ, तीन मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार व संगठन में एकजुटता का संदेश देते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा और कहा कि 2027 क्या, 2047 तक भी सैफई परिवार का मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा ही रहेगा।

यादव ने शनिवार को केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की तस्वीर साझा कर ‘एक्स’ पर कहा था, “दो स्टूल मिलकर कुर्सी नहीं बन सकते।”

राजनीतिक विश्लेषकों ने इसका मतलब निकाला कि दोनों मिलकर भी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।

केशव प्रसाद मौर्य ने ‘एक्स’ पर जवाब देते हुए कहा, “सपा बहादुर अखिलेश यादव, आपके इशारों पर मर्यादा लांघकर ‘फर्जी पीडीए’ परोसने वालों को प्रदेश की जागरूक जनता भली-भांति पहचानती है।”

उन्होंने कहा, “सदन में आपकी भाषा व आचरण ही आपके समर्थकों की शैली एवं व्यवहार में साफ दिखते हैं और यही आपकी राजनीति की असल फितरत भी उजागर करते हैं।”

मौर्य ने दावा किया, “साफ है कि 2027 क्या, 2047 तक भी सैफई परिवार का मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा ही रहेगा। सपा का पूरा इतिहास अराजकता, जुल्म और गुंडागर्दी के काले पन्नों से भरा रहा है, जिसे प्रदेश की जनता अब दोबारा स्वीकार नहीं करेगी। उत्तर प्रदेश में फिर एक बार कमल खिलेगा और सुशासन कायम रहेगा।”

उन्होंने एक अन्य पोस्ट में भाजपा की एकजुटता दिखाते हुए कहा, “अखिलेश यादव, आपको एक नेक सलाह है कि आप गलतफहमियों का शिकार न बनें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र के कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी तथा सरकार का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मेरे साथ समूचा भाजपा नेतृत्व एवं हर कार्यकर्ता चट्टान की तरह एकजुट है।”

मौर्य ने कहा, “‘सपा को सफा’ करने का हमारा संकल्प अटल है। बांटो और सत्ता हथियाने की आपकी सारी ‘कसरत’ धरी की धरी रह जाएगी। सपा की गुंडागर्दी और अराजकता हमेशा के लिए दफन हो जाएगी। 2017 व 2022 में आपका और आपकी सपा का जो हश्र हुआ था, उससे भी बुरा हाल 2027 में होने जा रहा है। यह गांठ बांध लीजिए।”

भाषा आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र