संभल हिंसा पूर्व नियोजित थी, पुलिस ने कार्रवाई कर सांप्रदायिक अशांति रोकी: जांच आयोग

संभल हिंसा पूर्व नियोजित थी, पुलिस ने कार्रवाई कर सांप्रदायिक अशांति रोकी: जांच आयोग

संभल हिंसा पूर्व नियोजित थी, पुलिस ने कार्रवाई कर सांप्रदायिक अशांति रोकी: जांच आयोग
Modified Date: August 5, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: August 5, 2026 9:48 pm IST

लखनऊ, पांच अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई हिंसा की जांच के लिए प्रदेश सरकार की ओर से गठित न्यायिक आयोग ने निष्कर्ष निकाला है कि यह हिंसा पूर्व नियोजित थी और पुलिस एवं जिला प्रशासन ने कार्रवाई कर राज्य और देश में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने से रोका। आयोग की 370 पन्ने की रिपोर्ट बुधवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई।

प्रदेश सरकार की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में 28 नवंबर 2024 को गठित तीन सदस्यीय आयोग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और पूर्व आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन शामिल थे।

संभल में अदालत के आदेश पर शाही जामा मस्जिद के दूसरे चरण के सर्वेक्षण के दौरान 24 नवंबर 2024 को हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों अन्य घायल हुए थे। इस घटना के सिलसिले में 12 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हिंसा संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल, जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली, अधिवक्ता कासिम अली और महमूद अली फारूकी, लड्डन खान एवं मस्जिद प्रबंधन समिति के अन्य सदस्यों ने कराई थी।

आयोग ने कहा कि ये लोग अदालत के 19 नवंबर 2024 के आदेश के खिलाफ थे, जिसके तहत मस्जिद के सर्वेक्षण का निर्देश दिया गया था।

रिपोर्ट में 19 नवंबर को मस्जिद के बाहर और 22 नवंबर को जुमे की नमाज के बाद बर्क की ओर से दिए गए भाषणों का हवाला दिया गया। आरोप है कि उन्होंने भाषणों में इस सर्वेक्षण को मस्जिद के अस्तित्व के लिए खतरा बताया था और लोगों को पुलिस प्रशासन के खिलाफ भड़काया था।

रिपोर्ट में कहा गया कि बर्क और सोहेल ने 24 नवंबर को भीड़ इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई थी।

आयोग ने हिंसक हमलों के बावजूद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस की सराहना की।

उसने कहा कि जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से भीड़ को मस्जिद में घुसने से रोकने में मदद मिली और सर्वेक्षण टीम की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पुलिसकर्मियों ने उन पर हमले के बावजूद हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया। इसमें कहा गया है कि हिंसा के दौरान चार लोगों की मौत पुलिस की गोलीबारी के कारण नहीं हुई।

आयोग ने कहा कि संभल हिंसा में पुलिस अधीक्षक और कई अन्य अधिकारियों समेत 28 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

भाषा

राजेंद्र पारुल

पारुल


लेखक के बारे में