सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का दावा, सपा में जल्द होगी टूट

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सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का दावा, सपा में जल्द होगी टूट

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  • Publish Date - June 20, 2026 / 10:26 PM IST,
    Updated On - June 20, 2026 / 10:26 PM IST

बलिया, 20 जून (भाषा) सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शनिवार को दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को “तिरछी नजर” से भी नहीं देखना चाहते और भविष्य में पार्टी बचाने के लिए उन्हें नेतृत्व से हटना पड़ सकता है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल सुभासपा प्रमुख ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन कर छह सीटें जीती थीं, लेकिन चुनाव के बाद वह सपा से अलग होकर राजग में शामिल हो गए। वर्तमान में वह लगातार सपा पर हमलावर हैं और पार्टी में टूट का दावा कर रहे हैं।

बलिया के बेरुआरबारी क्षेत्र में राजभर ने संवाददाताओं से कहा कि सपा का भी वही हश्र होगा जो शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस का हुआ।

उन्होंने दावा किया कि “पार्टी में टूट की शुरुआत बलिया की बागी धरती से होगी।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सपा सांसद राजीव राय की कथित मुलाकात के बाद पार्टी में बगावत की संभावनाएं बढ़ी हैं।

राजभर ने कहा कि राजीव राय कथित रूप से सपा में टूट की अगुवाई कर सकते हैं।

राजभर ने आरोप लगाया कि राजीव राय पर आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच चल रही है, जिसके चलते वे “सत्ता पक्ष के करीब जाने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव को ज़ाहूराबाद सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी।

राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव ने खुद विधानसभा में कहा था कि शिवपाल भाजपा की मदद करते हैं। आने वाले समय में पार्टी को बचाने के लिए अखिलेश को हटना पड़ेगा और शिवपाल नेतृत्व संभालेंगे।”

राम मंदिर को लेकर सपा की आलोचना पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर आंदोलन का विरोध किया, वे अब सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट का विषय है और इसमें सरकार की भूमिका नहीं है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजभर के दावों को खारिज करते हुए उन्हें “अफवाह फैलाने वाला मंत्री” बताया।

अखिलेश ने कहा कि सपा पूरी तरह एकजुट और मजबूत है तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दबाव और प्रलोभन के जरिए दलों को तोड़ने का प्रयास करती है।

सपा सांसद राजीव राय ने भी राजभर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए इस तरह के बयान देते हैं।

उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए राजभर के दावों पर तंज कसा और उन्हें “बेबुनियाद बयानबाजी” बताया।

राजभर ने हालांकि यह भी दावा किया कि सुभासपा के छह में से पांच विधायक उनके साथ हैं, जबकि एक विधायक सपा के साथ जुड़ा हुआ दिखाई देता है। उनके अनुसार पार्टी में कोई बड़ा विभाजन नहीं है।

यह बयान उनके बेटे अरुण राजभर के उस संकेत के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें अरुण ने कहा था कि सुभासपा के तीन विधायक सपा के झंडे लेकर घूमते देखे गए थे, जिससे पार्टी में एकता को लेकर सवाल उठने लगे थे।

भाषा

सं, आनन्‍द रवि कांत