गोरखपुर, 29 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक लंबे आंदोलन का नतीजा है और शहर के बदलते स्वरूप से भगवान राम का विरोध करने वाले कुछ लोग असहज हैं।
योगी ने सनातन धर्म के अनुयायियों से समाज में भ्रम और गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश करने वाली ताकतों से सतर्क रहने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने गोरक्षनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या का कायाकल्प, काशी विश्वनाथ धाम का विकास, विंध्याचल धाम का विकास और बड़े धार्मिक आयोजनों का होना व्यापक सांस्कृतिक बदलाव को उजागर करता है।
योगी ने रामायण के पात्र कालनेमि का जिक्र करते हुए कहा कि समाज को भ्रमित करने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी के बीच एकता को जरूरी बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रगति से देश मजबूत होगा, जबकि विभाजन से उसकी शक्ति कमजोर हो सकती है।
महंत दिग्विजयनाथ को श्रद्धांजलि देते हुए योगी ने शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि करीब एक सदी पहले स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
योगी ने साल 2019 के प्रयागराज कुंभ के बाद वृंदावन में आयोजित वैष्णव कुंभ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कोविड-19 महामारी के दौर में हुआ था और इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
गोरक्षपीठ को सनातन धर्म के व्यापक आदर्शों के प्रति समर्पित संस्था बताते हुए योगी ने कहा कि यहां संप्रदाय, पंथ, व्यक्ति या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग परंपराओं में पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन पीठ में सभी आध्यात्मिक परंपराओं का समान सम्मान किया जाता है।
योगी ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना तभी साकार हो सकती है, जब समाज के सभी वर्ग साझा उद्देश्य और एकजुट आवाज के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोग मिलकर काम करें, तो कोई ताकत भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती।
भाषा
सं. सलीम पारुल
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