बरेली/पीलीभीत (उप्र), तीन फरवरी (भाषा) बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने हिंदू समुदाय के अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने उठाने का आह्वान करते हुए मंगलवार को दिल्ली तक विरोध मार्च की योजनाओं की घोषणा की।
वर्ष 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री मंगलवार रात बरेली पहुंचे और परशुराम धाम में संवाददाताओं और समर्थकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश भर में हिंदू समुदाय अन्याय के खिलाफ संगठित हो रहा है।
उन्होंने समर्थकों से विरोध प्रदर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया।
परशुराम धाम को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि ऐसे धार्मिक स्थलों की रक्षा करना सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में मौजूद कुछ स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनके प्रस्तावित आंदोलन का समर्थन किया।
इससे पहले, मंगलवार को ही अग्निहोत्री ने पड़ोसी पीलीभीत जिले के बीसलपुर में एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एससी/एसटी एक्ट को रद्द करने की मांग की और प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम—2026 का विरोध किया।
अग्निहोत्री ने एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाया और दावा किया कि समाज के विभिन्न वर्ग इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सात फरवरी तक मांगें पूरी नहीं की गईं तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
अग्निहोत्री ने गत 26 जनवरी को सरकार की नीतियों, विशेष रूप से नये यूजीसी नियमों से असहमति जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि सरकार ने उनका इस्तीफा नामंजूर करते हुए उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया था।
इस्तीफे के बाद प्रशासन की ओर से मिले नोटिस और आरोप पत्र पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने समाज और सामान्य वर्ग के हक की बात करना अपराध कैसे हो गया?
भाषा सं. सलीम राजकुमार
राजकुमार