भारतीय भारोत्तोलकों का कमाल, मीराबाई ने जीता स्वर्ण; ऋषिकांत और मुथुपांडी ने हासिल किए रजत पदक

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भारतीय भारोत्तोलकों का कमाल, मीराबाई ने जीता स्वर्ण; ऋषिकांत और मुथुपांडी ने हासिल किए रजत पदक

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  • Publish Date - July 27, 2026 / 01:58 AM IST,
    Updated On - July 27, 2026 / 01:58 AM IST

(तस्वीरों के साथ) … अपराजिता उपाध्याय…

ग्लास्गो, 26 जुलाई (भाषा) ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय भारोत्तोलन में अपनी बादशाहत एक बार फिर साबित कर दी तो वहीं, ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी अपने अपने भार वर्गों ने ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर भारत के लिए दिन को यादगार बनाया। भारोत्तोलकों के दबदबे से भारत की पदक संख्या बढ़कर चार (एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य) हो गई। पदक तालिका में भारत आठवें स्थान पर है, जबकि 14 स्वर्ण, आठ रजत और 11 कांस्य सहित कुल 33 पदकों के साथ ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर काबिज है। महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 190 किलोग्राम (स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 105 किग्रा) वजन उठाया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के कई रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। यह मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक और कुल तीसरा पदक है। इससे पहले शुक्रवार को पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। मणिपुर की 31 वर्षीय दिग्गज भारोत्तोलक ने स्नैच और क्लीन एवं जर्क, दोनों में पहला प्रयास असफल रहने के बावजूद शानदार वापसी की और 22 किलोग्राम के बड़े अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। नाइजीरिया की रूथ असुक्वो न्योंग 168 किलोग्राम के साथ रजत पदक जीता। स्वर्ण पदक सुनिश्चित करने और एशियाई खेलों में दो महीने से भी कम समय शेष होने के कारण मीराबाई ने क्लीन एवं जर्क का अपना अंतिम प्रयास नहीं किया। इससे पहले पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांत सिंह चोट के बावजूद रजत पदक जीतने में सफल रहे। घुटने की चोट के कारण वह स्वर्ण पदक की दौड़ में अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सके। मणिपुर के 28 वर्षीय भारोत्तोलक ने स्नैच में 121 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की और क्लीन एवं जर्क से पहले शीर्ष स्थान पर थे। वह हालांकि क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम ही उठा सके। अंतिम दो प्रयास असफल रहने से उनका कुल वजन 264 किलोग्राम रहा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मलेशिया के मोहम्मद अनीक कसदान ने क्लीन एवं जर्क में 152 किलोग्राम का इन खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि केन्या के जोशुआ अमुंगा म्बोया 260 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक विजेता रहे। ऋषिकांत ने बताया कि प्रतियोगिता से एक सप्ताह पहले लगी घुटने की चोट क्लीन एवं जर्क के दौरान फिर उभर आई, जिससे भारी वजन उठाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई। उन्होंने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने आया था। स्नैच के बाद मैं पहले स्थान पर था, लेकिन घुटने में परेशानी हो गई। मैं वजन को क्लीन तो कर पाया, लेकिन उसे ऊपर नहीं धकेल सका क्योंकि एक जांघ ठीक से काम नहीं कर रही थी। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की।’’ ऋषिकांत ने इसके बावजूद इतिहास रचते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष भारोत्तोलक बनने का गौरव हासिल किया। वह खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले राज्य के पहले पुरुष खिलाड़ी भी हैं। राजा मुथुपांडी ने अपने पदार्पण को यादगार बनाते हुए रात के सत्र में पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। मुथुपांडी ने स्नैच में 126 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 160 किग्रा वजन उठाया, जिससे उनका कुल भार 286 किग्रा रहा। मलेशिया के मुहम्मद अजनिल बिन बिदिन ने राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड के साथ कुल 299 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 282 किग्रा के कुल भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया। जदुमणि सिंह ने पाकिस्तान के सुमामा रहमान को एकतरफा मुकाबले में शिकस्त दी जबकि एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता प्रीति पवार ने भी आसानी से जीत दर्ज कर राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में रविवार को क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। एसईसी सेंटर में ‘भारत माता की जय’ और ‘इंडिया-इंडिया’ के गूंजते नारों के बीच जदुमणि ने रहमान को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराया। सेना के इस मुक्केबाज ने अपनी बेहतरीन तकनीक, तेज गति और रिंग पर नियंत्रण के दम पर प्रभावशाली जीत दर्ज की। करगिल विजय दिवस पर अपनी जीत को करगिल युद्ध के वीरों को समर्पित करने वाले जदुमणि ने एक और शानदार प्रदर्शन के बाद अपना लक्ष्य दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह जीत करगिल के वीरों को समर्पित करना चाहता हूं। मैं सभी को हराकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना चाहता हूं।’’ महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग में प्रीति पवार ने भी क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर पदक की उम्मीदें कायम रखी हैं। भिवानी की 22 वर्षीय प्रीति ने प्री-क्वार्टर फाइनल में मलावी की डेबोरा मतेनजे को दूसरे दौर में ही आरएससी (रेफरी द्वारा मुकाबला रोकना) के फैसले से हराया। एशियाई खेलों (2022) की कांस्य पदक विजेता और पिछले वर्ष नयी दिल्ली विश्व कप की स्वर्ण पदक विजेता प्रीति ने मुकाबले में शुरू से ही दबदबा बनाए रखा। मलावी की मुक्केबाज को दोनों दौर में एक-एक बार स्टैंडिंग काउंट का सामना करना पड़ा। दूसरे दौर में मुकाबला समाप्त होने से 47 सेकंड पहले रेफरी ने लड़ाई रोक दी। पहले दौर में सभी पांचों जजों ने प्रीति के पक्ष में फैसला दिया था। दिन के तीसरे भारतीय मुक्केबाज आदित्य प्रताप को हालांकि पुरुष 65 किग्रा वर्ग के शुरुआती मुकाबले में युगांडा के नूह बाटे से 2-3 से हार का सामना करना पड़ा। भारत को रविवार को लॉन बॉल्स में निराशा हाथ लगी, जहां महिला युगल टीम इंग्लैंड से टाई-ब्रेकर में हारकर बाहर हो गई, जबकि पुरुष एकल में पुतुल सोनोवाल की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद भी टूट गई। पिंकी सिंह और रूपा रानी टिर्की की महिला युगल जोड़ी सेक्शन-बी के अपने अंतिम मुकाबले में इंग्लैंड से टाई-ब्रेकर में हार गई। दोनों टीमों ने एक-एक सेट जीता, जिसके बाद खेले गए निर्णायक एक-एंड टाई-ब्रेकर में इंग्लैंड ने 1-0 से जीत दर्ज कर 1-1 (3-4, 10-3) के परिणाम के साथ भारत को सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया। पुतुल सोनोवाल के रविवार को सेक्शन-डी के मैच में माल्टा के शॉन जेम्स पार्निस से 0.5-1.5 से हारने के बाद उनकी पुरुष एकल सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं। भाषा आनन्द आनन्द