लखनऊ, 20 फरवरी (भाषा) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से बचने और सरकार को लगभग 37 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए फर्जी बिजली बिल समेत जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके फर्जी कंपनी स्थापित करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक लखनऊ संभाग के आयकर उपायुक्त अशोक कुमार त्रिपाठी ने तीन नवंबर 2025 को एक शिकायत दी थी, जिसके बाद यह मामला महानगर पुलिस थाने में दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने एक काल्पनिक कंपनी मेसर्स के एस एंटरप्राइजेज बनाई, जो कथित तौर पर महानगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत बी-96, तेज हाउस, भगवती चरण वर्मा मार्ग से संचालित हो रही थी। कंपनी ने लौह अपशिष्ट एवं स्क्रैप, रीमेल्टिंग स्क्रैप और लौह/स्टील सिल्लियों के व्यापार के लिए जीएसटी पंजीकरण भी प्राप्त किया था।
जांच के दौरान पता चला कि कंपनी का पंजीकरण फर्जी बिजली बिल और फर्जी पते पर कराया गया था। दिए गए पते पर मकान मालिक ने पुलिस को सूचित किया कि उसके परिसर में ऐसा कोई कार्यालय या जीएसटी फर्म संचालित नहीं हो रही है।
प्रेस बयान के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाया और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लगभग 4.70 करोड़ रुपये का लेनदेन किया, जिसके परिणामस्वरूप 37.52 लाख रुपये रुपये की राजस्व क्षति हुयी, जिसमें उत्तर प्रदेश को 18.76 लाख रुपये की हानि हुयी।
इसमें कहा गया है कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लखनऊ के पारा थाने के दीपक कुमार (25) और प्रशांत तिवारी (25) तथा हरदोई जिले के रहने वाले कैलाश मौर्य (32) के तौर पर हुयी है।
पुलिस ने कहा कि दीपक ने कथित तौर पर उसके नाम पर बैंक खाते संचालित किए और विभिन्न कंपनियों के साथ लेनदेन किया।
प्रशांत तिवारी को चार चेक के माध्यम से लगभग 15 लाख रुपये हस्तांतरित किए गए, जिन्होंने कथित तौर पर उस पैसे का इस्तेमाल निजी खर्चों के लिए किया।
कैलाश मौर्य पर फर्म की फर्जी सील तैयार कराने और धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंक खाते खोलने में सहायता करने का आरोप है।
पुलिस ने बताया कि जिस व्यक्ति के नाम पर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किया गया था वह और अन्य अन्य आरोपी फरार हैं और उनका पता लगाने के प्रयास जारी हैं ।
भाषा सं जफर मनीषा रंजन
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