मथुरा में झूठी शान के खातिर हत्या के दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

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मथुरा में झूठी शान के खातिर हत्या के दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

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  • Publish Date - June 12, 2026 / 08:48 PM IST,
    Updated On - June 12, 2026 / 08:48 PM IST

मथुरा (उप्र), 12 जून (भाषा) मथुरा की एक अदालत ने झूठी शान के खातिर हत्या (ऑनर किलिंग) के एक मामले में शुक्रवार को दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। एक शासकीय अधिवक्ता ने यह जानकारी दी।

जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) शिवराम सिंह तरकर ने बताया कि मामले की सुनवाई, साक्ष्यों की जांच, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार (प्रथम) ने काली उर्फ संदीप और पुल्ली उर्फ नितेश को हत्या का दोषी पाया।

डीजीसी ने बताया कि यह मामला 15 मार्च 2024 की रात सुरीर थाना क्षेत्र के बिजाऊ गांव निवासी हेमंत की हत्या से संबंधित है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, हेमंत को उसके साले और उसके एक साथी ने कथित तौर पर घर से बाहर बुलाया और पास के भदनवारा गांव ले गए, जहां धारदार हथियारों से प्रहार कर उसकी हत्या कर दी गई।

इसने बताया कि हेमंत ने काली उर्फ संदीप की बहन से विवाह किया था, जो लड़की के परिवार की इच्छा के विरुद्ध था।

अगले दिन हेमंत के पिता ने काली उर्फ संदीप, पुल्ली उर्फ नितेश, विक्रम सिंह उर्फ चरण सिंह तथा तीन-चार अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया।

शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि भदनवारा गांव के कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने काली और पुल्ली को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया और मामला सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय भेज दिया गया।

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष विक्रम सिंह उर्फ चरण सिंह की संलिप्तता साबित करने में असफल रहा। इसलिए सुनवाई के दौरान उसे मामले से अलग कर दिया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि प्राथमिकी में नामजद अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

लेकिन अदालत ने काली उर्फ संदीप और पुल्ली उर्फ नितेश को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की कुल राशि में से 50,000 रुपये हेमंत के कानूनी वारिसों को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।

भाषा सं आनन्‍द खारी

खारी