लखनऊ, 23 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक व्यावसायिक भवन में आग लगने से 15 लोगों की मौत के बाद प्रदेशभर में अवैध इमारतों, बेसमेंट और बहुमंजिला भवनों में संचालित कोचिंग संस्थानों, होटलों, अस्पतालों और जिम के खिलाफ विशेष जांच अभियान शुरू किया गया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
वाराणसी के मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि सोमवार को शहर व पिंडरा क्षेत्र के नौ कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से पांच संस्थानों में अग्निशमन प्रणाली, फायर पंप और अन्य अग्निशमन उपकरणों की कमी पाई गई।
राजपूत ने बताया, ‘‘संबंधित संस्थानों को तत्काल सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए। निर्धारित समय के भीतर खामियां दूर नहीं किए जाने पर नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।’’
उन्होंने बताया कि वाराणसी में केवल 15 बड़े कोचिंग संस्थानों के पास ही अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) है जबकि बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम स्तर के कोचिंग संस्थान निर्धारित सुरक्षा मानकों के बिना संचालित हो रहे हैं।
राजपूत ने बताया, ‘‘विद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच अभियान जारी रहेगा।’’
वहीं, मेरठ जिला प्रशासन ने होटल, अतिथि गृह, लॉज और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच कराने का निर्णय लिया है।
अपर जिलाधिकारी (नगर) बृजेश कुमार सिंह ने मंगलवार को इसके लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की।
समिति में नगर मजिस्ट्रेट, सभी एसीएम एवं एसडीएम, सभी क्षेत्राधिकारी (सीओ), सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी को शामिल किया गया है।
जारी आदेश के मुताबिक, दिल्ली के एक होटल में तीन जून को और लखनऊ में 22 जून को हुई आग की घटनाओं को देखते हुए मेरठ में अग्निशमन, विद्युत सुरक्षा और अन्य मानकों की जांच आवश्यक है।
समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि लखनऊ हादसे के बाद अवैध इमारतों, बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों में संचालित कोचिंग संस्थानों, होटलों, अस्पतालों और जिम के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह अभियान विशेषकर उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ है, जहां आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस, अग्निशमन विभाग, कानपुर विकास प्राधिकरण, कानपुर नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, ताकि लखनऊ जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
भाषा सं आनन्द जितेंद्र
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