उप्र : बांके बिहारी मंदिर के लिए भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग
उप्र : बांके बिहारी मंदिर के लिए भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग
मथुरा, चार जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थानीय लोगों ने शनिवार को यहां बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गोस्वामी सदस्यों को ज्ञापन सौंपकर मंदिर निधि से प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के लिए की गई भूमि खरीद की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की।
ज्ञापन में संपत्तियों के मूल्यांकन में कथित असमानता, एक ही मूल संपत्ति के अलग-अलग हिस्सों के प्रति वर्ग मीटर मूल्य में बड़े अंतर, सड़क की चौड़ाई से संबंधित अभिलेखों में विसंगतियां, कुछ संपत्तियों को लेकर शिकायतें, विवादित भूमि की खरीद तथा गोस्वामी समुदाय के सदस्यों को अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने जैसे आरोपों की जांच कराने की मांग की गई है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित श्री बांके बिहारी मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त समिति के एक गोस्वामी सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं और इनकी जांच कराई जानी चाहिए।
ज्ञापन के अनुसार, बिक्री विलेखों, पंजीकरण विभाग (आईजीआरएस) के अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि भूमि खरीद की प्रक्रिया के कई पहलुओं की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
उन्होंने मांग की कि मंदिर निधि से की गई भूमि खरीद की जांच किसी स्वतंत्र और सक्षम एजेंसी से कराई जाए। इसमें मूल्यांकन रिपोर्ट, भुगतान संबंधी अभिलेख, उपसमिति की कार्यवाही, अनुमोदन और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच शामिल हो।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, नियमों के उल्लंघन या मंदिर निधि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए तथा संबंधित बिक्री पंजीकरण निरस्त किए जाएं।
इसमें यह भी मांग की गई कि मंदिर निधि से संपत्ति खरीद के लिए एक समान, पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मूल्यांकन नीति लागू की जाए, जिससे मंदिर प्रशासन के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो।
स्थानीय निवासी दीपक पाराशर ने कहा कि यह ज्ञापन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है बल्कि मंदिर निधि, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और जनविश्वास की रक्षा के उद्देश्य से दिया गया है।
उन्होंने कहा, “यदि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में यह सामने आता है कि सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमों के अनुसार किया गया है, तो इससे लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। वहीं, यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना भी उतना ही आवश्यक है।”
श्री बांके बिहारी मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त समिति के सदस्य एवं सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने भूमि पंजीकरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौंपा है।
उन्होंने कहा, “इस ज्ञापन को उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष रखा जाएगा। प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही प्रतीत होते हैं। मामले की जांच कराई जानी चाहिए।”
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत

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