उप्र: लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आग से क्षतिग्रस्त इमारत के अवैध हिस्सों को गिराने का आदेश दिया
उप्र: लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आग से क्षतिग्रस्त इमारत के अवैध हिस्सों को गिराने का आदेश दिया
लखनऊ, 10 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शुक्रवार को अलीगंज स्थित एक अवैध वाणिज्यिक इमारत के कुछ हिस्सों को ध्वस्त करने का आदेश दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले महीने इसी इमारत में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
यह आदेश प्लॉट नंबर 102, सेक्टर-डी, जोन-4, अलीगंज से जुड़े मामले में भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और अन्य लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत जारी किया गया। एलडीए के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भवन मालिकों को 15 दिनों के भीतर अनधिकृत निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया और अगर ऐसा नहीं किया गया तो प्राधिकरण खुद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा और खर्च की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जाएगी।
सक्षम प्राधिकारी अतुल कुमार द्वारा जारी आदेश को इमारत पर चस्पा कर दिया गया है।
आदेश के मुताबिक, भवन मालिकों को यह बताने का पर्याप्त अवसर दिया गया था कि अनधिकृत निर्माण को क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए लेकिन वे इसके खिलाफ कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सके।
अधिकारी ने बताया कि एलडीए के नामित प्राधिकारी के समक्ष जारी कार्यवाही अब समाप्त हो गई है।
सुनवाई में सामने आया कि इमारत को बेसमेंट और दो मंजिलों वाली आवासीय संरचना के रूप में मंजूरी दी गई थी लेकिन स्वीकृत मानचित्र का उल्लंघन कर इसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच में पाया गया कि ऊपरी मंजिल का निर्माण कथित तौर पर बिना अनुमति के किया गया था और वहां अवैध रूप से गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
इसके अलावा निर्माण मानकों और अनिवार्य नियमों के उल्लंघन भी पाए गए। एलडीए अधिकारी ने बताया कि प्राधिकरण की आंतरिक जांच में कई अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका जांच के दायरे में आई है।
उन्होंने बताया कि मामले में उचित कार्रवाई के लिए रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी गई है और साथ ही, घटना की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
ध्वस्तीकरण आदेश नामित प्राधिकारी द्वारा भवन मालिकों के वकील की करीब डेढ़ घंटे तक चली अंतिम दलीलें सुनने के बाद जारी किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया कि केवल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत इमारत को भवन नियमों का उल्लंघन कर बहुमंजिला वाणिज्यिक परिसर में बदल दिया गया।
अधिकारियों ने यह भी बताया था कि इमारत में जरूरी अग्नि सुरक्षा इंतजाम कथित तौर पर नहीं थे और ऊपरी मंजिल तक पहुंचने के लिए केवल एक रास्ता था, जहां एनीमेशन केंद्र था।
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आग लगने के एक दिन बाद 23 जून को शुरू की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), राम कृष्ण उपाध्याय (43), एनीमेशन केंद्र संचालक तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू (41) को गिरफ्तार किया था।
उपाध्याय, जायसवाल और साहू न्यायिक हिरासत में हैं।
घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को भी निलंबित किया था।
भाषा किशोर जफर जितेंद्र
जितेंद्र

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