दलित छात्रा की मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई साक्ष्यों पर आधारित : मेरठ एसएसपी

दलित छात्रा की मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई साक्ष्यों पर आधारित : मेरठ एसएसपी

दलित छात्रा की मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई साक्ष्यों पर आधारित : मेरठ एसएसपी
Modified Date: July 10, 2026 / 07:45 pm IST
Published Date: July 10, 2026 7:45 pm IST

मेरठ, 10 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडे ने अनुसूचित जाति की एक कॉलेज छात्रा की मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि इस सिलसिले में उठाया गया हर कदम उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उठाया गया है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक वीडियो संदेश में पांडे ने पुलिस कार्रवाई के समर्थकों और आलोचकों, दोनों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान की शुरुआत ‘हम भारत के लोग’ शब्दों से होती है और इसमें जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई केवल आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ की गई है और उठाए गए हर कदम के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

एसएसपी ने यह भी कहा कि पुलिस के पास उन लोगों के खिलाफ भी साक्ष्य हैं, जो कथित तौर पर बाहर से आकर माहौल खराब करने या मामले को लेकर अनावश्यक बयान देने का प्रयास कर रहे थे।

अपने खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां करने वालों का जिक्र करते हुए पांडे ने कहा कि उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा।

हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ संविधान और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पांडे ने अपने समर्थकों से चल रहे पौधारोपण अभियान के तहत एक पौधा लगाने और पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की।

उन्होंने अपने आलोचकों से भी दो पौधे लगाने तथा अपने गुस्से और ऊर्जा को समाज के कल्याण की दिशा में लगाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि यदि किसी को पुलिस जांच पर संदेह है तो वह पुलिस से संपर्क कर उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच कर सकता है।

इस बीच, बुधवार को कलेक्ट्रेट पर हुए प्रदर्शन के बाद एसएसपी के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) रमाकांत पचौरी को कथित तौर पर दी गई धमकी का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, खुद को अधिवक्ता बताने वाले कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा, ‘‘ बुधवार को जिस तरह एसएसपी पुलिस वाहन में बैठे थे, एक बार मुझे और एसएसपी को उसी वाहन में बंद कर दो, फिर देखना कौन बाहर निकलता है।’’

पचौरी ने कहा कि कॉल करने वाले की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह बयान एक दिन पहले पुलिस द्वारा अनुसूचित जाति की 20 वर्षीय छात्रा ललिता गौतम की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शन के सिलसिले में सात लोगों को गिरफ्तार करने और 30 से अधिक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद आया है।

पुलिस के अनुसार, गौतम 15 मई को टीपी नगर क्षेत्र से लापता हो गई थी और 17 मई को उसका शव रोहटा क्षेत्र से बरामद किया गया था।

मुख्य आरोपी को 18 मई को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाद में एक अन्य व्यक्ति को साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई।

पुलिस के अनुसार, बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति एकत्र होकर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रमुख मार्ग को करीब छह घंटे तक जाम रखा, मुख्य द्वार तोड़कर जिलाधिकारी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का प्रयास किया और पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला किया, जिसमें 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने पीड़िता के परिवार को उकसाया और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री प्रसारित की।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत


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