लखनऊ, 26 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक आयोग (यूपी रेरा) ने अपने नियमों में 10वां संशोधन करते हुए उपभोक्ता-केंद्रित कई अहम प्रावधान शामिल किए हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
नए प्रावधानों के तहत अपंजीकृत आवासीय परियोजनाओं में मकान खरीदने वालों को राहत देते हुए संपत्ति अंतरण से जुड़े शुल्कों की सीमा तय की गई है।
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 85 के तहत जारी ये संशोधन 25 मार्च, 2026 से लागू हो गए हैं। इनका मकसद रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाना है।
यूपी रेरा के अधिकारियों ने बताया कि इन बदलावों के तहत नियम 24 और 47 में संशोधन किया है।
संशोधित नियम 24 के तहत रेरा ने उस लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता को दूर कर दिया है कि क्या अपंजीकृत आवासीय परियोजनाओं के आवंटियों को रेरा के तहत राहत मिल सकती है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संशोधन में यह प्रावधान किया गया है कि ऐसे आवंटियों की शिकायतों की सुनवाई अब रेरा की पीठ द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा, ‘इन संशोधनों का मकसद शिकायत निवारण तंत्र को अधिक पारदर्शी, असरदार और उपभोक्ता-अनुकूल बनाना है।’
भाषा किशोर सलीम गोला
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