उप्र: कोऑपरेटिव बैंक में 21.5 करोड़ का घोटाला, तीन पूर्व प्रबंधक समेत 16 लोगों के खिलाफ मुकदमा

उप्र: कोऑपरेटिव बैंक में 21.5 करोड़ का घोटाला, तीन पूर्व प्रबंधक समेत 16 लोगों के खिलाफ मुकदमा

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 09:14 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 09:14 PM IST

गोंडा, 14 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक की एक शाखा में करीब 21.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और घोटाले के आरोप में तीन पूर्व शाखा प्रबंधकों और एक कैशियर समेत 16 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (नगर) आनंद राय ने बताया कि बैंक के सहायक महाप्रबंधक भुवन चंद्र सती की शिकायत पर यह मुकदमा दर्ज किया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि विशेष ऑडिट और बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट में ऋण वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितताओं व सुनियोजित धोखाधड़ी की पुष्टि हुई।

राय ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों और बैंक की आंतरिक नीतियों का उल्लंघन करते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल ने बैंक कर्मियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर अनियमिततापूर्ण तरीके से ऋण वितरित कर 21.47 करोड़ रुपये का गबन किया।

उन्होंने बताया कि बैंक की जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने अपनी माता, पत्नी और पुत्र के बैंक खातों का उपयोग किया।

अधिकारी ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि ऋण वितरण के नाम पर निकाली गई धनराशि को परिवार के खातों में डाला गया और यह वित्तीय अनियमितताएं दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच हुईं।

राय ने बताया कि इस अवधि में तैनात रहे विभिन्न शाखा प्रबंधकों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई और इसी आधार पर मुकदमे में कुल 16 लोगों को नामजद किया गया है।

उन्होंने बताया कि जिनके नाम मुकदमे में शामिल हैं, उनमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल, अजय कुमार व सुशील कुमार गौतम, तत्कालीन कैशियर पवन कुमार व खाताधारक सुमित्रा पाल, संजना सिंह, राज प्रताप सिंह, जय प्रताप सिंह, फूल मोहम्मद, राघव राम, शिवाकान्त वर्मा, रितेन्द्र पाल सिंह, गीता देवी वर्मा, दुष्यन्त प्रताप सिंह, मोहम्मद असलम और प्रतीक कुमार सिंह शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया कि इसी बैंक से जुड़े धोखाधड़ी और गबन के एक अन्य मामले में बहलोलपुर निवासी शिवेंद्र दुबे ने भी शिकायत दर्ज कराई है।

राय ने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया कि बैंक से लिए गए नौ लाख रुपये के गृह ऋण की नियमित किस्तें जमा करने के बावजूद अभिलेखों में हेराफेरी कर ऋण राशि 31 लाख रुपये दर्शा दी गई।

उन्होंने बताया कि विरोध करने पर पहले इसे तकनीकी त्रुटि बताया गया लेकिन बाद में बैंक प्रबंधन मुकर गया और शिकायत करने पर जेल भेजने व जान से मारने की धमकी भी दी गई, जिसके बाद शिवेंद्र दुबे ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बताया कि अदालत के आदेश पर धोखाधड़ी और गबन का मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।

भाषा सं. सलीम जितेंद्र

जितेंद्र