मथुरा, 22 जनवरी (भाषा) बसंत पंचमी पर बरसाना और नन्दगांव में होली का डांढ़ा गाड़े जाने के साथ ही शुक्रवार से ब्रज में होली का 40 दिन का उत्सव शुरू हो जाएगा।
जहां सभी जगह होली का पर्व बस एक या दो दिन मनाया जाता है, वहीं ब्रज में बसंत पंचमी के दिन से शुरू होने वाला होली का त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के पश्चात पड़वा पर होली खेले जाने के दस दिन बाद तक भी चलता रहता है।
वृंदावन में श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि देवताओं को गुलाल लगाया जाएगा जिसे प्रसाद के तौर पर श्रद्धालुओं पर उड़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी पर राधा रानी ने भगवान श्रीकृष्ण के गाल पर गुलाल लगाया था। मंदिरों को पीले रंग से सजाया जाएगा। ठाकुर बांके बिहारी पीले फूलों की माला धारण करेंगे और उन्हें विशेष भोग लगाया जाएगा।”
मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने कहा कि जहां ठाकुर जी को बृहस्पतिवार को गुलाल चढ़ाया जाएगा, मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर में होली आधिकारिक रूप से एक फरवरी को माघी पूर्णिमा से शुरू होगी। ठाकुर राजाधिराज रंगों के साथ होली खेलेंगे, लेकिन इसे श्रद्धालुओं पर नहीं फेंका जाएगा।
मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने कहा, “बृज में विशेष होली होती है क्योंकि यह राधा और कृष्ण से गहराई से जुड़ी है। हम इसे दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जीवन का यादगार अनुभव बनाने के प्रयास कर रहे हैं।”
जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा कि इस वर्ष का होली उत्सव ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं और बरसाना, नंदगांव, मथुरा, रावल, गोकुल, बलदेव, फालेन और महावन में प्रमुख स्थानों पर 23 विशाल द्वारों का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 24 और 25 फरवरी को बरसाना में एक दो दिवसीय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसमें करीब 800 कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दिए जाने की संभावना है।
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सं, राजेंद्र रवि कांत