उप्र: अजय राय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की समीक्षा करने की मांग की

उप्र: अजय राय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की समीक्षा करने की मांग की

उप्र: अजय राय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की समीक्षा करने की मांग की
Modified Date: August 25, 2026 / 04:44 pm IST
Published Date: August 25, 2026 4:44 pm IST

लखनऊ, 25 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की तत्काल समीक्षा करने की मांग की।

राय ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि एथनॉल नीति के तहत पेट्रोलियम आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत का दावा किया जाता है लेकिन अगर घरेलू चीनी की कमी के कारण चीनी का आयात करना पड़े तो उस पर भी विदेशी मुद्रा खर्च होगी।

उन्होंने कहा कि एथनॉल, चीनी उत्पादन, घरेलू कीमतों और आयात से संबंधित वास्तविक आंकड़े जनता के सामने स्पष्ट किए जाने चाहिए।

राय ने अपने पत्र में याद दिलाया कि उन्होंने सात जुलाई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन से जुड़े “वैज्ञानिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और उपभोक्ता हित संबंधी प्रश्न” उठाए थे।

उन्होंने कहा कि उस पत्र में ई20, ई85 और ई100 ईंधन की नीति की स्वतंत्र समीक्षा करने तथा उसके आर्थिक प्रभाव तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की मांग की गई थी।

राय ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी को भी उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण में कथित तौर पर विफल रहने के कारण मंत्रिमंडल से हटाने का आग्रह किया था।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने पत्र में कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मंत्रालय की एथनॉल नीति का प्रमुख तर्क यह रहा है कि इससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण 19.24 प्रतिशत तक पहुंच गया था और 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में नीति आगे बढ़ी।

राय ने कहा कि इसके बावजूद सरकार को 20 अगस्त को करीब एक दशक में पहली बार 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने कहा, “सीधा सवाल है कि एथनॉल नीति से पेट्रोलियम आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत का दावा किया जाता है लेकिन अगर घरेलू चीनी की कमी के कारण चीनी का आयात करना पड़े तो उस पर भी विदेशी मुद्रा खर्च होगी। इसलिए एथनॉल, चीनी उत्पादन, घरेलू कीमतों और आयात इन सभी का वास्तविक लेखा-जोखा जनता के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब सरकार के एक वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार स्वयं उपभोक्ताओं को विकल्प देने की आवश्यकता बता रहे हैं, तो एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में त्योहारों और पर्वों के शुरू होने से पहले सरकार एथनॉल नीति के साथ-साथ चीनी की कीमतों को लेकर भी कोई ठोस निर्णय लेगी। भाषा जफर जितेंद्र

जितेंद्र


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