उप्र: अलीगढ़ जहरीली शराब से मौतों के मामले में परिजनों को अब भी न्याय का इंतजार

उप्र: अलीगढ़ जहरीली शराब से मौतों के मामले में परिजनों को अब भी न्याय का इंतजार

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 10:44 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 10:44 PM IST

अलीगढ़, 19 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत के मामले को लगभग चार साल बीत जाने के बाद भी मृतकों के परिजन इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

अदालत ने जून 2021 में हुई इस घटना में 106 लोगों की मौते के लिए आरोपी एक शराब तस्कर को दोषी ठहराया है और उसे मंगलवार को सजा सुनायी जाएगी।

इसके बावजूद पीड़ितों की नजर में यह न्याय अधूरा है और कई आरोपी अब भी जमानत पर बाहर हैं।

अपर जिला न्यायाधीश अमित कुमार तिवारी की अदालत ने बीते शनिवार को फैसला सुनाते हुए मेथेनाल मिश्रित शराब बेचने के आरोपी तस्कर प्रमोद गुप्ता को दोषी करार दिया और उसे 20 दिसंबर को सजा सुनायी जाएगी।

स्थानीय लोगों और घटना के बाद की स्थिति पर नजर रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2021 की गर्मियों में कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान इस घटना ने गरीब और हाशिए पर खड़े समुदायों को बुरी तरह प्रभावित किया।

जहरीली शराब पीने से करसुआ गांव के प्रधान रितेश कुमार के गांव में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उस घटना ने प्रभावित परिवारों को अंदर तक हिला दिया था।

कुमार ने कहा, “पीड़ित परिवारों के बचे हुए सदस्य इतने कमजोर और भावनात्मक रूप से टूटे हुए हैं कि वे मुश्किल से ही अपने दर्द को बता पाते हैं और बस जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि कई परिवार इस मामले में खुद कानूनी कार्यवाही करने में असमर्थ थे और उन्हें अपनी ओर से अदालत में याचिका दायर करने के लिए दूसरे रिश्तेदारों को अधिकृत करना पड़ा।

प्रधान ने बताया कि जहरीली शराब पीने से कपिल के पिता जयपाल (60) और चचेरे भाई सुनील (40) की भी मौत हो गई थी।

कपिल ने बताया कि दोनों परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा मिला लेकिन यह बहुत कम था।

उन्होंने कहा, “यह रकम उन परिवारों के लिए बहुत कम है, जिनका कमाऊ सदस्य इस घटना में मारा गया।”

ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया कि यह घटना शराब माफिया, जानबूझकर जहरीले रसायन की आपूर्ति करने वाले व्यापारियों और भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों के गठजोड़ का नतीजा थी।

कपिल ने कहा, “जब तक इन जिम्मेदार लोगों को बचे हुए लोगों की मदद का वित्तीय बोझ उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाता तब तक कुछ लोगों को जेल भेजने से न्याय पूरा नहीं होगा।”

जिले के कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि मरने वालों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से ज्यादा थी और इस घटना के बाद कथित शराब माफियाओं समेत दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर चेरत गांव में भी जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हो गई थी।

इस गांव में पीड़ितों के परिवारों की मदद करने वाले वकील और सामाजिक कार्यकर्ता तेजवीर चौहान ने कहा कि कई शराब ठेकेदार जिन्हें जेल में होना चाहिये था, वे अब जमानत पर बाहर हैं, जो गलत है।

उन्होंने कहा, “जिन परिवारों ने अपने इकलौते कमाने वाले सदस्य को खो दिया उनके लिए पांच लाख रुपये का मुआवजा बहुत कम है।”

भाषा सं. सलीम जितेंद्र

जितेंद्र