लखनऊ, दो जून (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को युवा संगम कार्यक्रम को भारत की आत्मा को समझने और उसे आत्मसात करने का अभिनव अभियान करार देते हुए कहा कि युवाओं में वह ऊर्जा है, जो सीमाओं को मिटाकर संबंधों का नया मानचित्र रच सकते हैं।
यहां जनभवन में राज्यपाल मंगलवार को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत युवा संगम चरण-6 में अरुणाचल प्रदेश से आए प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष संवाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने युवाओं को भारत की विविधता का जीता-जागता दूत बताते हुए कहा कि आप में वह ऊर्जा है, जो सीमाओं को मिटाकर संबंधों का नया मानचित्र रच सकते हैं।
राज्यपाल का कहना था कि युवा संगम कार्यक्रम युवाओं के विचारों को विकसित करेगा, उनके अनुभवों को समृद्ध करेगा तथा उनके दृष्टिकोण को वैश्विक बनाएगा।
जन भवन के बयान के अनुसार अपने संबोधन में पटेल ने कहा, “यह पहल पूर्वोत्तर की सुरम्य वादियों से लेकर गंगा-गोमती की पावन धरती तक लोगों को जोड़ने का सशक्त प्रयास है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” को साकार करने में ऐसे आयोजनों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश की कला, संस्कृति, पारंपरिक खानपान, पर्यटन स्थलों और विकास को दर्शाती डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक परिदृश्य पर प्रस्तुति दी। अरुणाचल के विद्यार्थियों ने मनोहारी लोक नृत्य और ‘थीम सॉन्ग’ पर सामूहिक गायन प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने सभी प्रस्तुतियों को मनमोहक बताया।
राज्यपाल ने अरुणाचल भ्रमण की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि वहां हर पांच किलोमीटर पर नदी बहती दिखती है तथा बादल इतने करीब होते हैं कि यातायात तक रोकना पड़ता है। उन्होंने तवांग को फिल्म शूटिंग के लिए लोकप्रिय बताया और वहां शहीदों को पत्थर अर्पित कर श्रद्धांजलि देने की परंपरा का उल्लेख किया।
देश की विविधता का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश को काशी की आध्यात्मिकता, अयोध्या की आस्था और मथुरा-वृंदावन की भक्ति से, जबकि अरुणाचल को तवांग मठ की शांति और जीरो वैली की हरियाली से समृद्ध बताया।
भाषा आनन्द राजकुमार
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