Vande Bharat IBC24 News || Image- IBC24 News File
देहरादून: उत्तराखंड के हल्द्वानी में जिस कथित शुद्धिकरण का मुद्दा उठाकर राहुल गांधी, दोषियों पर FIR की मांग कर रहे थे। उसी मामले में राहुल गांधी पर ही FIR हो गई है। (Vande Bharat IBC24 News) राहुल का आरोप था कि कांग्रेस अध्यक्ष के साथ छूआछूत हुई है। सिर्फ इसीलिए क्योंकि वो दलित हैं, लेकिन अब हिंदू संगठन की शिकायत के बाद राहुल पर ही FIR हो गई। तो ये FIR क्यों हुई?
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8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली हुई। 2 दिन बाद इसी मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ हुआ और यहीं से सियासत शुरू हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खरगे के दलित होने की वजह से उनके कार्यक्रम के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया गया। राहुल गांधी ने इसे छुआछूत और दलितों के अपमान से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोषियों के खिलाफ SC-ST एक्ट में FIR की मांग की। लेकिन बीजेपी ने आरोपों को खारिज कर दिया।
बीजेपी का कहना है कि यह किसी जाति की वजह से नहीं, बल्कि मैदान की सफाई और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला था। विवाद में नया मोड़ तब आया। जब हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। (Vande Bharat IBC24 News) श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की शिकायत पर दर्ज FIR में आरोप है कि राहुल गांधी ने शुद्धिकरण की घटना को जातिगत रंग दिया और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई। मामले में BNS की धाराओं के साथ SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। यानी जिस मामले में राहुल गांधी FIR की मांग कर रहे थे उसी मामले में अब राहुल के खिलाफ ही FIR हो गई। बीजेपी के साथ-साथ अब इस मुद्दे पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी मैदान में उतर गए हैं। ओवैसी ने राहुल गांधी की गिरफ्तारी की मांग की है।
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राहुल गांधी पर FIR हुई तो पूरे देश समेत एमपी और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया और राहुल पर हुई FIR का विरोध किया। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी X पोस्ट में लिखा कि इससे भारतीय जनता पार्टी और RSS की मानसिकता का पता चलता है। जिस पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने पलटवार किया। अब मामले में जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी लेकिन राजनीतिक तौर पर लड़ाई अभी लंबी चलने वाली है यानी हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब सिर्फ FIR तक सीमित नहीं है। (Vande Bharat IBC24 News) ये अब नैरेटिव की लड़ाई बन चुकी है। एक तरफ दलित सम्मान का सवाल है। तो दूसरी तरफ इसे जातिगत रंग देकर सियासी लाभ लेने का आरोप।
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